8 साल से अटका मामला सुलझा, किशाऊ बांध पर हिमाचल की बड़ी जीत
8 साल से अटका मामला सुलझा, किशाऊ बांध पर हिमाचल की बड़ी जीत

Post by : Himachal Bureau

June 17, 2026 12:50 p.m. 119

हिमाचल प्रदेश को किशाऊ बांध परियोजना से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। राज्य सरकार के लगातार प्रयासों के बाद लंबे समय से अटके इस बड़े जलविद्युत और जल संसाधन परियोजना से जुड़े वित्तीय मुद्दे पर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। इससे न केवल राज्य के आर्थिक हितों की रक्षा हुई है बल्कि भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में भी हिमाचल को बड़ा लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

15 हजार करोड़ रुपये की है परियोजना

बताया जा रहा है कि टौंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बनाई जानी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 15 हजार करोड़ रुपये मानी जा रही है। यह परियोजना कई वर्षों से विभिन्न कारणों के चलते आगे नहीं बढ़ पा रही थी। विशेष रूप से बिजली घटक की लागत को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी, जिसके कारण परियोजना लंबे समय से अटकी हुई थी।

2000 करोड़ रुपये के बोझ से मिली राहत

हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में हिमाचल प्रदेश के हितों को प्रमुखता से रखा गया। लंबे समय से चल रहे गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई और सिद्धांत रूप से यह सहमति बनी कि परियोजना के बिजली हिस्से पर आने वाले लगभग 2000 करोड़ रुपये के खर्च का बोझ हिमाचल प्रदेश पर नहीं डाला जाएगा। यह खर्च उन राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा जिन्हें परियोजना के जल घटक से लाभ प्राप्त होगा।

राज्य के हितों की हुई रक्षा

इस फैसले को राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। परियोजना से जुड़े वित्तीय बोझ में कमी आने से हिमाचल प्रदेश के सीमित संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बनने वाली बड़ी परियोजनाओं का प्रभाव सबसे अधिक स्थानीय लोगों और प्रभावित क्षेत्रों पर पड़ता है। ऐसे में राज्य के हितों की रक्षा करना आवश्यक था।

हर साल मिलेगी 100 करोड़ यूनिट बिजली

सरकार का कहना है कि इस परियोजना के निर्माण से प्रदेश को भविष्य में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भी बड़ा लाभ मिलेगा। अनुमान है कि परियोजना पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश को हर वर्ष लगभग किशाऊ बांध परियोजना से 100 करोड़ यूनिट बिजली का हिस्सा प्राप्त होगा। इससे राज्य को राजस्व के रूप में महत्वपूर्ण आय मिलने की संभावना है, जो भविष्य में आर्थिक मजबूती का आधार बन सकती है।

कई राज्यों को होगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है बल्कि इससे जल प्रबंधन, सिंचाई और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। परियोजना के माध्यम से कई राज्यों को लाभ मिलेगा और राष्ट्रीय स्तर पर जल संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी। हिमाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए हर स्तर पर मजबूती से पक्ष रखा गया, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं।

विस्थापन की चुनौती भी रहेगी

परियोजना को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि इसके निर्माण के दौरान कुछ क्षेत्रों में लोगों को विस्थापन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के हितों और पुनर्वास को प्राथमिकता देना भी आवश्यक होगा। राज्य सरकार का मानना है कि विकास और जनहित के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।

ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगी मजबूती

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार जलविद्युत परियोजना के रूप में किशाऊ बांध भविष्य में उत्तरी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित हो सकता है। इससे बिजली उत्पादन बढ़ेगा और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। साथ ही राज्य को मिलने वाला बिजली हिस्सा आने वाले वर्षों में आय का नया स्रोत बनेगा।

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को होगा लाभ

इस फैसले को प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे राज्य के आर्थिक हित सुरक्षित हुए हैं और भविष्य में बिजली उत्पादन तथा विकास परियोजनाओं से मिलने वाले लाभों में भी बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश की भूमिका और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम को राज्य के हितों की रक्षा और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आने की संभावना है, जिससे प्रदेश को लंबे समय तक लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।

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