Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश की पैठी‑सी घाटियों में बसा Rampur Bushahr हर साल नवम्बर महीने में एक ऐसे उत्सव की मेजबानी करता है, जो सदियों से चलता आ रहा है और आज international star पर पहचाना जाता है — यही है International Lavi Fair। यह मेला केवल एक व्यापार मेला नहीं है, बल्कि हिमाचल की संस्कृति, इतिहास, उत्साह, कला और पर्वतीय लोगों की आत्मा का जीवंत उत्सव है। पुराने समय में जब पहाड़ों से गुज़रना एक चुनौती थी, तब यही Lavi Fair व्यापारियों को जोड़ता था और आज यही लोगों को जोड़ता है — दिलों से, संस्कृति से और कहानी से।
यहाँ की जीवंत उत्सव‑धुन, हाथ से बनी चीज़ों की खुशबू, लोक संगीत और हँसी‑खुशी का माहौल हर किसी को यादगार बनाकर लौटने पर मजबूर कर देता है। अगर आपने कभी सुना है जहाँ इतिहास और आज का समय साथ चलते हैं— तो यही Lavi Fair है।
Rampur का International Lavi Fair 17वीं सदी से शुरू हुआ — जब राजा केहर सिंह ने हिमालय की दुर्गम घाटियों को जोड़ने के लिए एक बिना टैक्स व्यापार संधि (tax‑free trade agreement) बनाया। उस समय यह रास्ता सिर्फ पहाड़ों के साहसी यात्रियों का था, पर यही राह जल्दी ही व्यापारियों के लिए उत्सव‑मार्ग बन गई।
पुराने ज़माने में यहां ऊन, पश्मीना शॉल, सूखे मेवे, पहाड़ी घोड़े और सुगंधित मसाले खरीदे‑बेचे जाते थे — और यह व्यापार अनेक देशों और राज्यों तक फैलता था। यही व्यापार आज Lavi Fair की शुरुआत का मूल कारण माना जाता है।
नाम Lavi का अपना भी अर्थ है — यह एक प्राचीन शब्द है जो ऊनी वस्त्रों और व्यापारिक वस्तुओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। यानि इस मेले का इतिहास सिर्फ 100‑200 साल पुराना नहीं, बल्कि लगभग 400 साल से भी अधिक समय का है।
यह मेला दुनिया के उन चुनिंदा मेलों में से एक है जो आज भी अपने original व्यापार और सांस्कृतिक उत्सव रूप को जीवित रखता है। यहाँ कोई बड़ी‑बड़ी कंपनियाँ नहीं, कोई बड़ी‑बड़ी कॉर्पोरेट स्टॉल नहीं — पर हैं स्थानीय कारीगर, व्यापारी, कलाकार और यात्रियों की भीड़।
हर साल International Lavi Fair आम तौर पर 11 से 14 नवंबर के बीच आयोजित होता है।
चार दिनों तक चलने वाला यह मेला Rampur Bushahr के Part Bungalow, PGSS Boys School और आसपास की घाटियों तक फैल जाता है।
भक्त, पर्यटक और व्यापारी चारों ओर रंगीन बाज़ार में चलते हैं, स्टॉलों पर खरीद‑फरोख्त करते हैं, लोक कलाकारों के कार्यक्रम देखते हैं और पहाड़ों की ठंडी हवा में इस उत्सव का पूरा आनंद उठाते हैं।
यह मेला सिर्फ हिमाचल के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और विदेशों से भी लोग आकर्षित होते हैं।
क्यों? क्योंकि यहाँ उन्हें मिलता है:
लोक परंपरा से जुड़ी वस्तुएँ
सीधी बातचीत कारीगरों से
पूरी संस्कृति का हस्ताक्षर अनुभव
व्यापार के साथ‑साथ सीखने का मौका
लावी मेला सिर्फ देखने का नहीं — जीने का अनुभव है।

Official Location: Rampur Bushahr, Distt. Shimla, Himachal Pradesh
Chandigarh से यात्रा इस प्रकार आसान है:
Lavi Fair में हर कोई सिर्फ खरीद‑फरोख्त नहीं करता; यहाँ संस्कृति, जीवन और पहाड़ी लोगों की आत्मा का अनुभव होता है।
स्थानीय लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा में आते हैं, हल्दी‑लाल कपड़े, ढोल‑नगाड़े और लोक गीत की धुन पूरे शहर को गुंजित करते हैं। बच्चे, युवा, बूढ़े — सब एक ही उत्साह से भाग लेते हैं।
रात को जब मंच पर कलाकार लोक धुनों को प्रस्तुत करते हैं, लोग तालियों के साथ झूमते हैं, और पहाड़ों की ठंडी हवा में संगीत‑धुन का एहसास एक जादू की तरह फैलता है — तभी लगता है कि यही सच में हिमाचल का दिल है।
Lavi Fair ने आज लोक कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंच दिया है।
यहाँ व्यापार और पर्यटन का मिश्रण व्यापारियों, कारीगरों और स्थानीय लोगों को रोजगार और सीख देता है। साथ‑साथ बाहर से आए यात्रियों को हिमाचल की संस्कृति और पहाड़ी जीवन शैली समझने का मौका मिलता है।
इस मेले का प्रभाव सिर्फ़ आर्थिक नहीं — यह हाॢमण्य, कला, भाषा, संगीत और रिश्तों के अनुभवों से भरा उत्सव है, जहाँ हर कोई सीखता है, साझा करता है और बस खुशी से भरा अनुभव लेकर लौटता है।
International Lavi Fair हमारी संस्कृति, इतिहास, व्यापार और पहाड़ों की ऊर्जा का एक अनोखा संगम है।
यह मेला बताता है कि कैसे पुरानी परंपराएँ आज भी ज़िंदा हैं, कैसे हिमाचल की मिट्टी में व्यापार और उत्सव का मेल सदियों से चला आ रहा है, और कैसे हर साल लाखों लोग अपने सपनों, संस्कृति और यादों के साथ यहाँ आते हैं।
यह कोई साधारण मेला नहीं — यह Rampur Bushahr की आत्मा है, हिमाचल की धड़कन है, और हमारे इतिहास और भविष्य का एक सुन्दर मिलन है।
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