पालमपुर में किसानों के लिए जैविक एवं प्राकृतिक खेती पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित
पालमपुर में किसानों के लिए जैविक एवं प्राकृतिक खेती पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित

Author : Rajesh Vyas

Feb. 27, 2026 3:33 p.m. 2330

चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर द्वारा कांगड़ा जिले के किसानों के लिए ‘जैविक एवं प्राकृतिक खेती’ विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र (RCNOF), गाजियाबाद के सहयोग से आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में भवारना, पंचरुखी और पालमपुर खंड के 50 से अधिक किसान उपस्थित थे। कार्यक्रम का उद्घाटन जैविक कृषि एवं प्राकृतिक खेती विभाग के अध्यक्ष डॉ. जनार्दन सिंह ने किया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को वर्तमान कृषि परिदृश्य और सतत उत्पादन हेतु जैविक एवं प्राकृतिक खेती की महत्वता के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. सिंह ने बताया कि पशुधन आधारित संसाधनों का समुचित उपयोग और वैज्ञानिक रूप से विकसित प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाना किसानों के लिए लाभकारी है।

अपने संदेश में कुलपति प्रो. अशोक कुमार पांडा ने कहा कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती न केवल सतत कृषि सुनिश्चित करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाया जाए और हिमाचल प्रदेश में दीर्घकालिक कृषि स्थिरता स्थापित की जा सके।

क्षेत्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र, गाजियाबाद के प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. क्षितिज कुमार ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के उद्देश्य, लाभ और केंद्र द्वारा देशभर में इस खेती को बढ़ावा देने की गतिविधियों की जानकारी दी। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रमेश्वर ने उपस्थित किसानों और अतिथियों का स्वागत करते हुए जैविक एवं प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों और प्रबंधन पद्धतियों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। वहीं, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. गोपाल कटना ने जैविक और प्राकृतिक उत्पादों के विपणन की रणनीतियों और उपयुक्त फसल किस्मों के चयन पर विशेषज्ञ सलाह साझा की।

डॉ. राकेश चौहान ने किसानों को जीवामृत, बीजामृत, यूपेटोरियम अर्क और अन्य जैविक तरल व ठोस उर्वरकों की तैयारी, उपयोग और फसल में प्रभाव के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि इन जैविक उत्पादों के उपयोग से मृदा स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता में सुधार सुनिश्चित किया जा सकता है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती की पूरी प्रक्रिया, वैज्ञानिक तरीके और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने बताया कि उन्हें इस प्रशिक्षण से अपने खेतों में जैविक और प्राकृतिक पद्धतियों को अपनाने की नई जानकारी मिली है, जिससे उनकी पैदावार में सुधार होगा और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इस आयोजन से यह भी स्पष्ट हुआ कि हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय और RCNOF का उद्देश्य किसानों को केवल तकनीकी ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि उन्हें सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से किसान न केवल अपनी खेती में सुधार करेंगे बल्कि राज्य में कृषि के क्षेत्र में नई दिशा भी स्थापित होगी।

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