Author : Rajesh Vyas
चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर द्वारा कांगड़ा जिले के किसानों के लिए ‘जैविक एवं प्राकृतिक खेती’ विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र (RCNOF), गाजियाबाद के सहयोग से आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में भवारना, पंचरुखी और पालमपुर खंड के 50 से अधिक किसान उपस्थित थे। कार्यक्रम का उद्घाटन जैविक कृषि एवं प्राकृतिक खेती विभाग के अध्यक्ष डॉ. जनार्दन सिंह ने किया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को वर्तमान कृषि परिदृश्य और सतत उत्पादन हेतु जैविक एवं प्राकृतिक खेती की महत्वता के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. सिंह ने बताया कि पशुधन आधारित संसाधनों का समुचित उपयोग और वैज्ञानिक रूप से विकसित प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाना किसानों के लिए लाभकारी है।
अपने संदेश में कुलपति प्रो. अशोक कुमार पांडा ने कहा कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती न केवल सतत कृषि सुनिश्चित करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाया जाए और हिमाचल प्रदेश में दीर्घकालिक कृषि स्थिरता स्थापित की जा सके।
क्षेत्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र, गाजियाबाद के प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. क्षितिज कुमार ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के उद्देश्य, लाभ और केंद्र द्वारा देशभर में इस खेती को बढ़ावा देने की गतिविधियों की जानकारी दी। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रमेश्वर ने उपस्थित किसानों और अतिथियों का स्वागत करते हुए जैविक एवं प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों और प्रबंधन पद्धतियों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। वहीं, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. गोपाल कटना ने जैविक और प्राकृतिक उत्पादों के विपणन की रणनीतियों और उपयुक्त फसल किस्मों के चयन पर विशेषज्ञ सलाह साझा की।
डॉ. राकेश चौहान ने किसानों को जीवामृत, बीजामृत, यूपेटोरियम अर्क और अन्य जैविक तरल व ठोस उर्वरकों की तैयारी, उपयोग और फसल में प्रभाव के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि इन जैविक उत्पादों के उपयोग से मृदा स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता में सुधार सुनिश्चित किया जा सकता है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती की पूरी प्रक्रिया, वैज्ञानिक तरीके और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने बताया कि उन्हें इस प्रशिक्षण से अपने खेतों में जैविक और प्राकृतिक पद्धतियों को अपनाने की नई जानकारी मिली है, जिससे उनकी पैदावार में सुधार होगा और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इस आयोजन से यह भी स्पष्ट हुआ कि हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय और RCNOF का उद्देश्य किसानों को केवल तकनीकी ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि उन्हें सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से किसान न केवल अपनी खेती में सुधार करेंगे बल्कि राज्य में कृषि के क्षेत्र में नई दिशा भी स्थापित होगी।
मोनिका ठाकुर ने CSIR NET JRF में हासिल की ऑल इंडिया 65वीं रै...
मंडी की मोनिका ठाकुर ने CSIR NET JRF में ऑल इंडिया 65वीं रैंक हासिल कर सराज और हिमाचल का नाम रोशन कि
1 सितंबर 1972 को कांगड़ा से अलग बना था हमीरपुर जिला, जानें इ...
Hamirpur स्थापना दिवस पर जानें जिले का इतिहास, वीरभूमि की पहचान, कटोच वंश और 1 सितंबर 1972 को जिला ब
बिजली महादेव मंदिर में चला सफाई अभियान, 2 क्विंटल प्लास्टिक ...
कुल्लू के बिजली महादेव मंदिर में Rotary Club और रोवर्स-रेंजर्स ने सफाई अभियान चलाया। करीब 2 क्विंटल
हिमाचल में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, इन लक्षणों को न करें न...
हिमाचल में Swine Flu के मामले बढ़े। जानें H1N1 Symptoms, बचाव, इलाज और कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूर
नेपाल में फंसे हिमाचलियों की जानकारी दें, प्रशासन ने जारी कि...
Nepal Flood के बीच हमीरपुर प्रशासन अलर्ट, नेपाल गए परिजनों से संपर्क न होने पर तुरंत अधिकारियों को स
मणिमहेश यात्रा के पहले दिन 253 श्रद्धालु हुए रवाना, 20 सितंब...
Manimahesh Yatra 2026 के पहले दिन 253 श्रद्धालु रवाना हुए। Heli Taxi सेवा भी शुरू, 20 सितंबर तक चलेग
हिमाचल में स्वाइन फ्लू की दस्तक, इन लक्षणों को न करें नजरअंद...
हिमाचल में Swine Flu के 4 मामले मिले। जानें H1N1 Virus के लक्षण, बचाव के उपाय और कब लेनी चाहिए डॉक्ट