हिमाचल के लिए विशेष पैकेज की मांग लेकर केंद्र पहुंचे सुक्खू
हिमाचल के लिए विशेष पैकेज की मांग लेकर केंद्र पहुंचे सुक्खू

Post by : Ram Chandar

March 2, 2026 2:57 p.m. 130

हिमाचल प्रदेश: के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के राजस्व घाटे की भरपाई हेतु विशेष केंद्रीय वित्तीय सहायता की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि हिमाचल प्रदेश एक छोटा और पहाड़ी राज्य है, जिसकी भौगोलिक परिस्थितियां, सीमित संसाधन और विकास संबंधी चुनौतियां बड़े राज्यों से भिन्न हैं। ऐसे में राज्य की तुलना उन बड़े राज्यों से करना उचित नहीं है, जिनकी आर्थिक स्थिति और राजस्व स्रोत अधिक मजबूत हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि राज्य के कुल राजस्व में राजस्व घाटा अनुदान का योगदान लगभग 12.7 प्रतिशत रहा है, जो नागालैंड के बाद देश में दूसरा सबसे अधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े राज्य इस अनुदान के बिना अपनी वित्तीय व्यवस्था संभाल सकते हैं, लेकिन सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले हिमाचल प्रदेश के लिए यह संभव नहीं है।

सुक्खू ने कहा कि सभी राज्यों का एक समान मानकों पर आकलन करना न तो व्यावहारिक है और न ही पारदर्शिता तथा सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप है। उन्होंने इसे छोटे और विशेष परिस्थितियों वाले राज्यों के हितों के विरुद्ध बताया।

मुख्यमंत्री ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 275(1) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें राज्यों को उनकी आय और व्यय के बीच के अंतर को कम करने के लिए अनुदान देने का प्रावधान है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वित्त आयोग ने छोटे पहाड़ी राज्यों की विशिष्ट विकास आवश्यकताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। सरकार ने कोई भी अतिरिक्त बजट से बाहर ऋण नहीं लिया है और विभिन्न उपकरों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय भी जुटाई जा रही है। इसके बावजूद वस्तु एवं सेवा कर लागू होने के बाद राज्य को राजस्व में नुकसान हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां संभव हुआ, वहां कर दरों में वृद्धि की गई है और सब्सिडी को व्यवस्थित करने जैसे कदम भी उठाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद राजस्व और व्यय के बीच का अंतर पूरी तरह कम नहीं हो सका है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से आग्रह किया कि पहाड़ी राज्यों की विशेष आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन करने और उनके लिए दीर्घकालिक समाधान सुझाने हेतु एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में बुनियादी ढांचे का विकास, आपदा प्रबंधन, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सेवाओं पर प्रति व्यक्ति खर्च अन्य राज्यों की तुलना में अधिक आता है। ऐसे में विशेष वित्तीय सहायता राज्य के संतुलित और सतत विकास के लिए आवश्यक है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और राज्य की समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह और वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार भी उपस्थित रहे।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करेगी, जिससे विकास कार्यों की गति बनाए रखने और वित्तीय संतुलन को मजबूत करने में मदद मिलेगी

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