पालमपुर में किसानों को शैप पद्धति से खेती का प्रशिक्षण, बाजार की मांग के अनुसार फसलें उगाने पर जोर
पालमपुर में किसानों को शैप पद्धति से खेती का प्रशिक्षण, बाजार की मांग के अनुसार फसलें उगाने पर जोर

Author : Rajesh Vyas

Oct. 31, 2026 10:43 a.m. 118

पालमपुर। किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को बाजार की जरूरतों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से जाइका वित्तपोषित हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना चरण-द्वितीय के तहत पालमपुर में इन-फील्ड प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। खंड परियोजना प्रबंधन इकाई पालमपुर की ओर से बहाव सिंचाई योजना छू नाला कूहल से जुड़े किसानों के लिए आयोजित इस प्रशिक्षण में शैप (SHEP) पद्धति के आधार पर खेती करने की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पारंपरिक खेती के तरीके में बदलाव लाकर बाजार की मांग के अनुसार फसलों का चयन करने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें समझाया गया कि केवल फसल उगाने के बाद उसे बेचने की कोशिश करने के बजाय पहले बाजार की जरूरतों और मांग को समझना चाहिए और फिर उसी के अनुसार खेती की योजना तैयार करनी चाहिए। इस रणनीति को 'उगाओ और बेचो' से आगे बढ़कर 'बेचने के लिए उगाओ' की नीति के रूप में समझाया गया। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार अवसरों से जोड़ना और उनकी आमदनी में वृद्धि के लिए प्रोत्साहित करना है।

अमित भूषण ने परियोजना की गतिविधियों की जानकारी दी

कार्यक्रम की शुरुआत में खंड परियोजना प्रबंधक पालमपुर अमित भूषण ने किसानों को जाइका वित्तपोषित हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना और इसके तहत लागू की जा रही विभिन्न गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने शैप पद्धति की कार्यप्रणाली और खेती में इसके संभावित लाभों को विस्तार से समझाया। प्रशिक्षण में बताया गया कि किसानों को फसल उत्पादन के साथ-साथ बाजार की मांग, बिक्री की संभावनाओं और उपभोक्ताओं की जरूरतों पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे किसान अपनी खेती को अधिक योजनाबद्ध तरीके से कर सकते हैं और बाजार में मांग वाली फसलों के चयन को प्राथमिकता दे सकते हैं।

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बैंकिंग योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किया प्रेरित

कार्यक्रम में अग्रणी जिला प्रबंधक कांगड़ा रणवीर ने किसानों को बैंकिंग सेवाओं और कृषि क्षेत्र के लिए उपलब्ध वित्तीय योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बैंकों के माध्यम से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), फसल ऋण, हरित योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (PMFME) और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) जैसी योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने किसानों से इन योजनाओं की जानकारी लेने और पात्रता के अनुसार इनका लाभ उठाने का आग्रह किया। प्रशिक्षण के दौरान बैंकिंग सुविधाओं के माध्यम से खेती और उससे जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के विकल्पों पर भी चर्चा हुई।

प्रगतिशील किसान अशोक कुमार ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में परियोजना के पहले चरण के तहत बहाव सिंचाई योजना गबली कूहल से जुड़े प्रगतिशील किसान अशोक कुमार ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने किसानों को बाजारोन्मुख खेती अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। अशोक कुमार ने बताया कि किसानों को अपनी उपज का बेहतर बाजार उपलब्ध करवाने के लिए सामूहिक प्रयास करने चाहिए। यदि किसी किसान के पास उत्पादन की मात्रा कम है और वह अकेले अपनी उपज बाजार तक नहीं पहुंचा सकता, तो ऐसे में कई किसान मिलकर अपने उत्पाद को बाजार तक पहुंचा सकते हैं। सामूहिक रूप से उपज की बिक्री करने से किसानों को बाजार से जुड़ने में मदद मिल सकती है। उन्होंने किसानों को खेती के साथ-साथ उत्पादन के विपणन पर भी ध्यान देने और आपसी सहयोग से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

नुक्कड़ नाटक से खेती के प्रति किया जागरूक

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भी किसानों को जागरूक और प्रोत्साहित किया गया। इस गतिविधि के जरिए खेती के नए तरीकों और बाजार की जरूरतों को समझने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में किसानों को शैप पद्धति अपनाने, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और बाजार को ध्यान में रखकर फसल उत्पादन की योजना बनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कृषि और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि रहे मौजूद

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में अग्रणी जिला प्रबंधक कांगड़ा रणवीर, केसीसी बैंक के सहायक प्रबंधक सुमित, प्रगतिशील किसान अशोक कुमार, कृषक विकास एसोसिएशन के प्रधान विनोद कुमार, खंड परियोजना प्रबंधक अमित भूषण, विक्रांत राणा, स्वाति सूद सहित कृषि विशेषज्ञ और बहाव सिंचाई योजना छू नाला कूहल से जुड़े किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को खेती के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने, बैंकिंग योजनाओं की जानकारी लेने और सामूहिक विपणन को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

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