Author : Rajesh Vyas
पालमपुर के बिंद्राबन स्थित दुग्ध अभिशीतन केंद्र में हिमाचल प्रदेश दुग्ध उत्पादक सहकारी प्रसंघ शिमला की कांगड़ा इकाई के तत्वावधान में दुग्ध उत्पादकों के लिए एक विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के पशुपालकों को आधुनिक दुग्ध उत्पादन तकनीकों, पशुओं की बेहतर देखभाल और स्वच्छ दूध उत्पादन के बारे में जानकारी देना था।
शिविर के दौरान पशुपालकों को बताया गया कि यदि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और वैज्ञानिक तरीके से पशुओं की देखभाल करें, तो दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। विशेषज्ञों ने समझाया कि आज के समय में डेयरी क्षेत्र में नई तकनीकों और बेहतर प्रबंधन पद्धतियों का उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सके।
इस प्रशिक्षण शिविर में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के प्रधानाचार्य डॉ. सत्यपाल कुरे और वैज्ञानिक डॉ. दामिनी आर्य ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। उन्होंने दुग्ध उत्पादक किसानों को पशुओं की उचित देखभाल, संतुलित आहार, दुग्ध पशुओं की उत्तम नस्लों के चयन और विभिन्न बीमारियों से बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि संतुलित आहार देने से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध की मात्रा तथा गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है। इसके साथ ही समय-समय पर टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच से पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है। शिविर में स्वच्छ दुग्ध उत्पादन के महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि दूध दुहते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दूध संग्रहण और भंडारण की सही प्रक्रिया अपनाने से दूध की गुणवत्ता बनी रहती है और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होता है।
प्रशिक्षण शिविर की अध्यक्षता कांगड़ा इकाई के प्रभारी श्री अखिलेश प्राशर ने की। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश दुग्ध उत्पादक सहकारी प्रसंघ शिमला की ओर से कांगड़ा इकाई के अंतर्गत किसानों को जागरूक करने के लिए नियमित रूप से ऐसे शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि अधिक से अधिक किसान वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि करें और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दें।
उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यदि किसानों को सही प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिले तो वे इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर सकते हैं। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को नई जानकारी और आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। शिविर में बड़ी संख्या में दुग्ध उत्पादकों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से अपनी समस्याओं के समाधान भी पूछे। किसानों ने बताया कि उन्हें इस प्रशिक्षण से नई जानकारियां मिली हैं, जिनका वे अपने दैनिक कार्य में उपयोग करेंगे।
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