हिमाचल में मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने रॉयल्टी में भारी कटौती की
हिमाचल में मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने रॉयल्टी में भारी कटौती की

Post by : Himachal Bureau

June 4, 2026 4:17 p.m. 438

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के विभिन्न जलाशयों में मछली पकड़ने वाले मछुआरों की आय बढ़ाने और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने जलाशयों से मछली पकड़ने पर लगने वाली रॉयल्टी को 7.5 प्रतिशत से घटाकर केवल 1 प्रतिशत करने का फैसला किया है। यह निर्णय वर्ष 2026-27 के बजट घोषणा के अनुरूप लिया गया है और इससे पहले भी सरकार ने रॉयल्टी दर को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया था।

इस फैसले से राज्य के गोविंद सागर, पौंग डैम, चमेर, रंजीत सागर और कोल डैम जैसे प्रमुख जलाशयों पर निर्भर लगभग 6500 से अधिक मछुआरा परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और मछुआरों की आजीविका को स्थिर बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे मछली पालन क्षेत्र को नई गति मिलेगी और राज्य की नीली अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार मछुआरों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नीतिगत समर्थन, आधारभूत ढांचे के विकास और मूल्य संवर्धन गतिविधियों के माध्यम से मछुआरों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि रॉयल्टी और लाइसेंस फीस में की गई यह कमी मछुआरों को बड़ी राहत प्रदान करेगी और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाएगी।

मुख्यमंत्री ने मत्स्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि संशोधित नीति का लाभ सभी पंजीकृत मछुआरों तक पहुंचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि पहले की रॉयल्टी प्रणाली के कारण मछुआरा सहकारी समितियों और व्यक्तिगत मछुआरों की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था, लेकिन अब 1 प्रतिशत की दर से उनकी लाभप्रदता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस फैसले से जलाशय क्षेत्रों से पलायन की समस्या में कमी आएगी और मछुआरों को अपने ही क्षेत्रों में स्थायी रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही राज्य में उभरती हुई मत्स्य आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मछली पकड़ने के क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

इसमें फिश लैंडिंग सेंटर का विकास, बर्फ भंडारण की सुविधा, और बाजार से बेहतर जुड़ाव जैसी योजनाएं शामिल हैं, ताकि मछुआरों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके। सरकार का मानना है कि यह निर्णय केवल आर्थिक राहत नहीं है, बल्कि यह मछुआरों के सम्मान और उनके योगदान को मान्यता देने का भी एक प्रयास है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा और राज्य के जलाशय आधारित समुदायों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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