Post by : Himachal Bureau
ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री के विरोध में देशभर में आयोजित एक दिवसीय हड़ताल का असर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला में भी व्यापक रूप से देखने को मिला। जिले के लगभग सभी निजी मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे आम लोगों और मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खासकर वे मरीज अधिक परेशान दिखाई दिए जो रोजाना जरूरी दवाइयों पर निर्भर हैं और जिन्हें समय पर दवा लेना जरूरी होता है।
मेडिकल स्टोर बंद रहने के कारण कई मरीजों को बिना दवा लिए ही वापस लौटना पड़ा। दूरदराज क्षेत्रों से आए लोगों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ी क्योंकि उन्हें जरूरी दवाइयां नहीं मिल सकीं। अस्पतालों में भी मरीजों की भीड़ देखने को मिली, लेकिन वहां भी बाहर से मिलने वाली कई दवाइयों की जरूरत पड़ने पर लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
यह हड़ताल देशभर के केमिस्ट और दवा विक्रेताओं के संगठन के आह्वान पर की गई थी। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण छोटे मेडिकल स्टोरों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही बिना सही जांच और वैध पर्चे के दवाइयों की बिक्री को भी गंभीर खतरा बताया गया। हालांकि इस दौरान लोगों को कुछ राहत सरकारी योजनाओं के तहत चल रहे दवा केंद्रों से मिली। इन केंद्रों में दवाइयां लेने के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। कई मरीजों ने बताया कि उन्हें अपनी जरूरत की कुछ दवाइयां वहां से मिल गईं, लेकिन सभी दवाइयां उपलब्ध नहीं थीं।
दवा विक्रेताओं का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी छूट देकर छोटे दुकानदारों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनका मानना है कि इससे पारंपरिक मेडिकल स्टोरों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। संगठन ने कहा कि देशभर में लाखों लोग इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। हड़ताल के दौरान जिला भर में मेडिकल स्टोर बंद रहने से लोगों को घंटों तक दवाइयों के लिए भटकना पड़ा। कई मरीजों और उनके परिजनों ने चिंता जताई कि नियमित दवाइयां समय पर नहीं मिलने से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
दवा विक्रेताओं ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवाइयां बेचने वाली कंपनियों के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और बिना वैध चिकित्सकीय सलाह के दवाओं की बिक्री पर रोक लगाई जाए। संगठन का कहना है कि यह केवल व्यापार का मुद्दा नहीं बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ मामला है। इस दौरान केमिस्ट हड़ताल को लेकर कई जगहों पर चर्चा होती रही और लोगों ने भी सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की। वहीं लगातार बढ़ती दवा संकट जैसी स्थिति ने आम जनता की परेशानियां और बढ़ा दी हैं।
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