अदालत के आदेश नहीं मानने पर विश्वविद्यालय अधिकारियों के खिलाफ बड़ा एक्शन
अदालत के आदेश नहीं मानने पर विश्वविद्यालय अधिकारियों के खिलाफ बड़ा एक्शन

Post by : Himachal Bureau

May 21, 2026 11:05 a.m. 1519

प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों की अनुपालना न करने पर बड़ा और सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने डॉक्टर यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार के खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं। इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और अदालत के आदेशों को गंभीरता से लेने के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।

यह मामला एक कर्मचारी की पेंशन से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता नेक राम ने अदालत में याचिका दायर कर मांग की थी कि उनके वर्कचार्ज कार्यकाल को भी सेवा अवधि में शामिल किया जाए ताकि उन्हें पेंशन का पूरा लाभ मिल सके। इस मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पहले भी विश्वविद्यालय प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पहले दिए गए आदेशों का पालन नहीं किया गया। अदालत ने पिछली सुनवाई में विश्वविद्यालय के अधिकारियों को अनुपालना संबंधी दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए थे। साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि आदेशों पर अमल नहीं होता है तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।

इसके बावजूद न तो दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और न ही अधिकारी अदालत में पहुंचे। अदालत ने इस रवैये को गंभीर मानते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। न्यायाधीश ने कहा कि अदालत के आदेशों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। इसके बाद वारंट जारी करने के आदेश दिए गए और संबंधित अधिकारियों को तय तारीख पर अदालत में पेश होने के निर्देश दिए गए।

जानकारी के अनुसार अदालत ने पहले भी विश्वविद्यालय को कई अवसर दिए थे ताकि मामले का समाधान किया जा सके। लेकिन बार-बार समय मिलने के बाद भी आदेशों की अनुपालना नहीं हुई। इसके चलते अदालत को सख्त कदम उठाना पड़ा। इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारी संगठनों और आम लोगों का कहना है कि अदालत के आदेशों का समय पर पालन होना चाहिए ताकि कर्मचारियों को न्याय मिल सके और उन्हें बार-बार अदालत का दरवाजा न खटखटाना पड़े।

इस मामले के बाद अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि आदेशों की अवहेलना जारी रही तो आगे और कड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं इस पूरे विवाद ने अदालती आदेशों के पालन और सरकारी संस्थानों की जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

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