मंडी के सावन बरवाल ने एशियाई खेलों में जीता रजत, 44 साल बाद भारत को मैराथन में पदक
मंडी के सावन बरवाल ने एशियाई खेलों में जीता रजत, 44 साल बाद भारत को मैराथन में पदक

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Sept. 26, 2026 2:38 p.m. 110

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंद्रनगर से निकले भारतीय धावक सावन बरवाल ने एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की मैराथन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में सावन ने 42.195 किलोमीटर की मैराथन दौड़ 2 घंटे 11 मिनट 36 सेकंड में पूरी की और भारत के खाते में रजत पदक जोड़ा।

सावन बरवाल ने सुधारा अपना राष्ट्रीय रिकॉर्ड

सावन बरवाल की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने इसी साल अपना बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बेहतर कर दिया। अप्रैल में रॉटरडैम मैराथन में सावन ने 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने इस प्रदर्शन के साथ महान भारतीय धावक शिवनाथ सिंह का वर्ष 1978 से कायम 2 घंटे 12 मिनट का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा था। अब एशियाई खेलों में 2 घंटे 11 मिनट 36 सेकंड के समय के साथ सावन ने अपने ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड में सुधार किया है। लगातार बेहतर होते प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय मैराथन में एक प्रमुख नाम के रूप में स्थापित किया है।

44 साल बाद भारत को मिला मैराथन पदक

सावन बरवाल के रजत पदक के साथ एशियाई खेलों में पुरुषों की मैराथन स्पर्धा में भारत का 44 साल लंबा पदक इंतजार भी खत्म हुआ। भारत ने इससे पहले वर्ष 1982 में दिल्ली में आयोजित एशियाई खेलों में पुरुष मैराथन में पदक जीता था। सावन अब एशियाई खेलों के इतिहास में पुरुष मैराथन में पदक जीतने वाले भारत के चौथे धावक बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय लंबी दूरी की दौड़ के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जापान के धावक ने जीता स्वर्ण

फाइनल मुकाबले में जापान के इचिटाका यामाशिता ने स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि चीन के फेंग पेइयू ने कांस्य पदक जीता। सावन ने शुरुआत से ही अग्रणी धावकों के बीच अपनी स्थिति बनाए रखी। 21 किलोमीटर के पड़ाव तक सावन दूसरे स्थान पर थे और 35 किलोमीटर तक वह पदक की स्थिति में बने रहे। मैराथन के अंतिम चरण में जापानी धावक ने बढ़त बनाई, लेकिन सावन ने अपनी गति और धैर्य बनाए रखा और रजत पदक अपने नाम कर लिया।

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जोगिंद्रनगर से एशियाई खेलों तक का सफर

सावन बरवाल की इस उपलब्धि से उनके गृह क्षेत्र जोगिंद्रनगर और पूरे मंडी जिले में खुशी का माहौल है। उनके पहले खेल प्रशिक्षक गोपाल ठाकुर ने भी उनकी सफलता पर खुशी जताई है। राष्ट्रीय रिकॉर्ड में लगातार सुधार के बाद एशियाई खेलों में रजत पदक जीतना सावन के करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है। उनकी इस सफलता से हिमाचल प्रदेश का नाम भारतीय एथलेटिक्स के मंच पर भी प्रमुखता से सामने आया है।

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