Post by : Shivani Kumari
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, यह तिब्बत बर्फीले तूफ़ान पिछले दस वर्षों का सबसे भीषण तूफ़ान है। चीन मौसम विभाग ने पहले ही एवरेस्ट मौसम चेतावनी जारी की थी, लेकिन कई पर्वतारोही पहले से ऊँचाई पर थे और नीचे लौटना संभव नहीं था।
तूफ़ान की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच गई। दृश्यता लगभग शून्य हो गई, जिससे बचाव कार्य बेहद कठिन हो गया।
तिब्बत के शिगात्से और एवरेस्ट के उत्तरी मार्ग पर सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत दलों को सक्रिय किया और आपातकालीन स्थिति घोषित की।
मौसम विभाग ने कहा कि अगले 48 घंटे तक हिमालयी क्षेत्र में बर्फ़बारी जारी रह सकती है।
अब तक मिली जानकारी के अनुसार, मृतक एक यूरोपीय पर्वतारोही है। उसके साथ के दल के कई सदस्य गंभीर रूप से घायल हैं। करीब 200 पर्वतारोही फंसे हुए हैं, जिनमें भारत, नेपाल, चीन, जापान और अमेरिका के नागरिक शामिल हैं।
एवरेस्ट बचाव अभियान के तहत तिब्बती प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया है। लगभग 300 सैनिक और पर्वत बचाव दल मौके पर भेजे गए हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से ऊँचाई वाले क्षेत्रों में खोज अभियान चलाया जा रहा है।
एक भारतीय पर्वतारोही ने सैटेलाइट फ़ोन से बताया, “हमने ऐसा तूफ़ान पहले कभी नहीं देखा। हवा इतनी तेज़ थी कि तंबू उड़ गए। कई लोग बर्फ़ में दब गए। हम एक-दूसरे को देख भी नहीं पा रहे थे।”
एवरेस्ट मौसम चेतावनी के अनुसार, यह तूफ़ान हिमालयी क्षेत्र में पिछले दस वर्षों का सबसे भीषण तूफ़ान है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का पैटर्न अस्थिर हो गया है।
भारत, नेपाल और चीन की सरकारों ने संयुक्त रूप से राहत सहायता की पेशकश की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि तिब्बत में फंसे भारतीय पर्वतारोहियों से संपर्क बनाए रखा जा रहा है।
पर्वतारोहण सुरक्षा पर काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने कहा कि एवरेस्ट क्षेत्र में मौसम की अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में पर्वतारोहण अभियानों के लिए रियल-टाइम मौसम निगरानी प्रणाली को अनिवार्य किया जाए।
तिब्बत के स्थानीय गाँवों में भी इस तूफ़ान का असर पड़ा है। कई घरों की छतें उड़ गईं और बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान और ग्लेशियर पिघलना मौसम की चरम स्थितियों को बढ़ा रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
सरकारें अब इस बात पर विचार कर रही हैं कि पर्वतारोहण अभियानों के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली और आपातकालीन प्रशिक्षण को अनिवार्य किया जाए।
इस हिमालयी आपदा 2025 ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि प्रकृति के सामने मनुष्य कितना असहाय है।
माउंट एवरेस्ट का यह तिब्बत बर्फीले तूफ़ान वर्ष 2025 की सबसे बड़ी पर्वतीय आपदाओं में से एक बन गया है। तिब्बत राहत अभियान लगातार जारी है और बचाव दल हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि सभी पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकाला जा सके।
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