Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शनिवार को अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने महिलाओं के हितों और अधिकारों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का मुख्य कारण हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा महिलाओं के लिए शुरू किया गया हिम बस कार्ड था। समिति ने स्पष्ट रूप से इस योजना का विरोध जताया और इसे महिलाओं के लिए राहत के बजाय आर्थिक बोझ करार दिया।
जनवादी महिला समिति की राज्य सचिव फालमा चौहान ने कहा कि हिम बस कार्ड योजना महिलाओं के लिए राहत का साधन बनने की बजाय उन्हें आर्थिक बोझ में डाल रही है। उन्होंने बताया कि सभी महिलाएं रोजाना बस से यात्रा नहीं करतीं, और राज्य में सरकारी बसों की आवाजाही भी सीमित है। ऐसे में यह कार्ड केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा। फालमा ने यह भी कहा कि जिन परिवारों में तीन से चार महिलाएं हैं, उनके लिए कार्ड बनवाना महंगा साबित हो रहा है। इसके अतिरिक्त, लोक मित्र केंद्रों में आवेदन और पुनः आवेदन के लिए शुल्क देना भी लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाल रहा है।
जिला सचिव सोनिया ने कहा कि शिमला शहर में सरकारी बसों की संख्या कम होने के कारण महिलाओं को बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने के लिए अक्सर निजी बसों का सहारा लेना पड़ता है। इससे हिम बस कार्ड का उपयोग भी सीमित रह जाता है। वहीं, हिम्मी ने ग्रामीण क्षेत्रों की परिवहन समस्या की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बसों की आवाजाही पहले ही सीमित है। इसके कारण लोग यात्रा का अधिकांश हिस्सा पैदल या छोटी गाड़ियों से पूरा करते हैं।
महिला समिति की शहरी कोषाध्यक्ष रमा रावत ने कहा कि ग्रामीण रूटों पर अक्सर खराब बसें भेजी जाती हैं, जिससे यात्रियों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बंद पड़े बस रूटों को तुरंत बहाल किया जाए ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बस सेवाओं का बेहतर संचालन सुनिश्चित हो सके।
इस दौरान एसएफआई के राज्य अध्यक्ष सनी सेकता ने छात्रों की समस्याओं को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों तक बसों की कमी के कारण छात्र आवागमन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि छात्रों की सुविधाओं को देखते हुए बस सेवाओं में सुधार किया जाए।
प्रदर्शन के बाद समिति के प्रतिनिधिमंडल ने परिवहन निगम के महाप्रबंधक से मुलाकात की और अपनी मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि यदि हिम बस कार्ड योजना को बंद कर महिलाओं को पहले की तरह किराए में छूट नहीं दी गई, तो भविष्य में परिवहन निगम के कार्यालय का घेराव किया जाएगा। समिति ने चेतावनी दी कि महिलाओं और आम जनता की समस्याओं को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
जनवादी महिला समिति का यह प्रदर्शन केवल योजना के विरोध तक सीमित नहीं था। यह महिलाओं और आम जनता के हितों के लिए आवाज उठाने का प्रयास था। हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की समस्याओं और महिलाओं पर आर्थिक बोझ को ध्यान में रखते हुए सरकार और परिवहन निगम से शीघ्र सुधार की मांग की गई है। समिति का कहना है कि महिलाओं की सुविधाओं और यात्रा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बस सेवाओं में सुधार अनिवार्य है।
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