Author : Pawan Kumar
हिमाचल प्रदेश के मंडी में आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश-विदेश में भी प्रसिद्ध है। इस भव्य धार्मिक उत्सव में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों देवी-देवता अपने रथों के साथ भाग लेते हैं। इस वर्ष भी मंडी में आयोजित इस महोत्सव में सराज घाटी के आराध्य देव प्रभु श्री खुड़ी जहल महाराज ने अपनी पावन उपस्थिति दर्ज करवाई। महोत्सव के समापन के बाद अब प्रभु श्री खुड़ी जहल महाराज 21 दिनों की लंबी और कठिन यात्रा पूरी करके अपने मूल स्थान कोठी बहली स्थित देवालय लौट आए हैं।
देवता की यह वापसी यात्रा किसी साधारण यात्रा से कम नहीं थी। देवता के कारदारों और भक्तों के अनुसार मंडी से अपने मूल स्थान तक पहुंचने के लिए लगभग 150 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ी। यह यात्रा पूरी तरह से पैदल की गई, जिसमें देवता के रथ के साथ हारियान और श्रद्धालु लगातार चलते रहे। पहाड़ी रास्तों, ऊंचे-नीचे मार्गों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस यात्रा को पूरा किया।
इस यात्रा के दौरान कई ऊंची पहाड़ियों और कठिन दर्रों को पार करना पड़ा। बताया जा रहा है कि रास्ते में कई जगह लगभग चार फीट तक बर्फ जमी हुई थी, जिसे पार करते हुए श्रद्धालुओं ने देवता के रथ को सुरक्षित आगे बढ़ाया। कई ऊंची चोटियों और दुर्गम रास्तों से गुजरते हुए यह यात्रा पूरी की गई। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल शारीरिक शक्ति का ही नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का भी प्रतीक है।
मंडी से शुरू हुई यह यात्रा कुल 21 दिनों तक चली। इस दौरान देवता का रथ विभिन्न गांवों से होकर गुजरा, जहां स्थानीय लोगों ने देवता का भव्य स्वागत किया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और देवता के दर्शन किए। इस यात्रा के दौरान लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला और हर गांव में देवता के आगमन पर धार्मिक माहौल बन गया।
देवता की वापसी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कई भक्त पूरे रास्ते देवता के साथ चलते रहे और भजन-कीर्तन करते हुए इस यात्रा को और भी भक्तिमय बनाते रहे। ढोल-नगाड़ों की धुन और जयकारों के साथ देवता का रथ आगे बढ़ता रहा। श्रद्धालुओं का कहना था कि देवता के साथ इस यात्रा में शामिल होना उनके लिए बेहद सौभाग्य की बात है।
प्रभु श्री खुड़ी जहल महाराज सराज घाटी के लोगों के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि देवता क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं। यही कारण है कि देवता के आगमन और प्रस्थान के समय पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है।
21 दिनों की लंबी यात्रा के बाद जब देवता का रथ अपने मूल स्थान कोठी बहली पहुंचा तो वहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। स्थानीय लोगों ने देवता का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना की गई और भक्तों ने देवता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
हिमाचल प्रदेश विशेष रूप से कुल्लू-मंडी क्षेत्र अपनी समृद्ध देव संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां देवी-देवताओं की परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी लोग उसी श्रद्धा और आस्था के साथ इन परंपराओं को निभा रहे हैं। मंडी महाशिवरात्रि महोत्सव भी इसी देव संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
देवता के साथ इस लंबी यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि यह उनके जीवन का एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव रहा। कठिन रास्तों और लंबी दूरी के बावजूद उन्होंने इस यात्रा को बेहद आनंद और श्रद्धा के साथ पूरा किया।
प्रभु श्री खुड़ी जहल महाराज की यह वापसी यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम है। 21 दिनों तक चली इस यात्रा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि हिमाचल की देव संस्कृति आज भी लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि देवता के आशीर्वाद से पूरे क्षेत्र में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहेगी।
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