Author : Man Singh
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के पास स्थित जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट प्रदेश का एक महत्वपूर्ण हवाई अड्डा है। यह एयरपोर्ट शिमला शहर से लगभग 22 किलोमीटर दूर जुब्बड़हट्टी क्षेत्र में स्थित है। पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण इसकी भौगोलिक स्थिति काफी विशेष मानी जाती है।
यह एयरपोर्ट समुद्र तल से लगभग 1546 मीटर यानी करीब 5073 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। चारों ओर ऊंचे पहाड़ और ढलान होने के कारण इसका निर्माण पहाड़ी ढलान पर किया गया है। यही कारण है कि यहां से आसपास के पहाड़ों और घाटियों का बेहद सुंदर दृश्य दिखाई देता है। यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है और यहां का वातावरण शांत और आकर्षक रहता है।
जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट का क्षेत्र पहाड़ी और ढलानदार है। यहां का मौसम अधिकतर ठंडा और सुहावना रहता है। हालांकि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां मौसम अचानक बदल जाता है। कई बार बादल, धुंध और बारिश के कारण दृश्यता कम हो जाती है। ऐसी परिस्थितियों में कोहरा और बादल छाने के कारण कई बार उड़ानों का संचालन प्रभावित हो जाता है। खराब मौसम के कारण उड़ानों को रद्द भी करना पड़ता है। यही कारण है कि यहां उड़ानों का संचालन काफी हद तक मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है।
हालांकि यह एयरपोर्ट शिमला शहर से लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित है, लेकिन सड़क मार्ग से यह अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। शिमला शहर से यहां तक पहुंचने के लिए सड़क सुविधा उपलब्ध है और यात्री टैक्सी या निजी वाहन के माध्यम से आसानी से यहां पहुंच सकते हैं। यह एयरपोर्ट शिमला और आसपास के क्षेत्रों के लिए हवाई संपर्क का एक महत्वपूर्ण साधन है। इसके माध्यम से लोग देश के अन्य शहरों तक कम समय में पहुंच सकते हैं और इससे पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलता है।
जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट का निर्माण कार्य 1960 के दशक में शुरू किया गया था। उस समय पहाड़ी क्षेत्र में एयरपोर्ट बनाना एक बड़ी चुनौती माना जाता था। इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने पहाड़ों को काटकर और ढलान को समतल बनाकर इस एयरपोर्ट का निर्माण किया। लगभग 1967 के आसपास इसका निर्माण कार्य पूरा किया गया और इसे उड़ानों के लिए चालू किया गया। बाद में इस एयरपोर्ट को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अधीन संचालित किया जाने लगा।
जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट का रनवे लगभग 1230 मीटर यानी करीब 4035 फीट लंबा है। रनवे छोटा होने और चारों ओर पहाड़ होने के कारण यहां बड़े विमान नहीं उतर सकते। इसी कारण यहां मुख्य रूप से छोटे विमान ही उतरते और उड़ान भरते हैं। विमान संचालन के दौरान पायलटों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्र में उड़ान भरना सामान्य एयरपोर्ट की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।
वर्तमान समय में इस एयरपोर्ट से सीमित उड़ान सेवाएं उपलब्ध हैं। यहां मुख्य रूप से छोटे विमान संचालित किए जाते हैं। इस एयरपोर्ट से दिल्ली, धर्मशाला और कुल्लू के लिए उड़ान सेवाएं उपलब्ध हैं। हालांकि इन उड़ानों का संचालन पूरी तरह मौसम और दृश्यता की स्थिति पर निर्भर करता है। खराब मौसम होने पर उड़ानों को रद्द या स्थगित किया जा सकता है।
शिमला देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है और हर साल हजारों पर्यटक यहां घूमने के लिए आते हैं। जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट पर्यटकों के लिए शिमला तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हवाई सेवा के माध्यम से पर्यटक कम समय में शिमला पहुंच सकते हैं। इससे पर्यटन उद्योग को भी काफी लाभ मिलता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट कई मायनों में खास माना जाता है। यह एयरपोर्ट पहाड़ी को काटकर बनाया गया है, इसलिए इसका निर्माण कार्य काफी चुनौतीपूर्ण था।
इसका रनवे भारत के कई बड़े एयरपोर्ट की तुलना में छोटा है। यही कारण है कि यहां केवल छोटे विमान ही उतर सकते हैं। यह एयरपोर्ट समुद्र तल से लगभग 1546 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यहां से आसपास के पहाड़ों का बेहद सुंदर दृश्य दिखाई देता है। यह दृश्य पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है। क्योंकि यह एयरपोर्ट पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, इसलिए धुंध या बादल होने की स्थिति में उड़ानों के संचालन पर असर पड़ता है और कई बार उड़ानें रद्द भी करनी पड़ती हैं।
इस एयरपोर्ट से सीमित संख्या में उड़ानें संचालित होती हैं। दिल्ली से शिमला आने वाली उड़ान सुबह लगभग 9 बजे के आसपास पहुंचती है। वहीं शिमला से दिल्ली के लिए उड़ान सुबह लगभग 10 बजे के आसपास रवाना होती है। इसके अलावा शिमला से धर्मशाला और कुल्लू के लिए भी उड़ान सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। हालांकि इन उड़ानों का समय मौसम और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बदल सकता है।
जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट आकार में छोटा जरूर है, लेकिन इसका महत्व काफी अधिक है। यह एयरपोर्ट शिमला और आसपास के क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने का काम करता है। इसके माध्यम से न केवल स्थानीय लोगों को सुविधा मिलती है बल्कि पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है। भविष्य में यदि यहां उड़ानों की संख्या बढ़ाई जाती है और सुविधाओं का विस्तार किया जाता है, तो यह एयरपोर्ट हिमाचल प्रदेश के हवाई संपर्क को और अधिक मजबूत बना सकता है।
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