Author : Rajesh Vyas
हिमाचल प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। इसी दिशा में जिला कांगड़ा में प्राकृतिक खेती से तैयार गेहूं की सरकारी खरीद प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। इस बार सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए प्राकृतिक गेहूं का खरीद मूल्य 80 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया है। पिछले वर्ष यह मूल्य 60 रुपये प्रति किलोग्राम था। खरीद मूल्य में हुई इस बढ़ोतरी से किसानों में उत्साह है और बड़ी संख्या में किसान प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार का मानना है कि बेहतर दाम मिलने से किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदेश में प्राकृतिक खेती का दायरा भी तेजी से बढ़ेगा।
15 जून से 22 जून तक चली खरीद प्रक्रिया
कृषि विभाग की ओर से 15 जून से 22 जून 2026 तक जिला कांगड़ा के तीन अलग-अलग खरीद केंद्रों पर प्राकृतिक गेहूं की खरीद की गई। किसानों की सुविधा के लिए ढलियारा, फतेहपुर और नगरोटा बगवां स्थित नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों को खरीद केंद्र बनाया गया। यहां किसानों की उपज की गुणवत्ता की जांच करने के बाद सरकारी दर पर खरीद सुनिश्चित की गई। पूरी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी रखा गया ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
374 किसानों से खरीदा गया 776.50 क्विंटल गेहूं
आत्मा परियोजना के परियोजना निदेशक डॉ. शशि पाल अत्री ने बताया कि इस वर्ष जिले के 374 किसानों से कुल 776.50 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं खरीदा गया। पिछले वर्ष 358 किसानों से 836.943 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई थी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल फसल खरीदना नहीं, बल्कि किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति प्रोत्साहित करना भी है ताकि आने वाले वर्षों में अधिक किसान इस खेती से जुड़ सकें।
तीनों खरीद केंद्रों पर रही अच्छी भागीदारी
खरीद प्रक्रिया के दौरान फतेहपुर केंद्र में 123 किसानों से 520 क्विंटल, ढलियारा केंद्र में 79 किसानों से 104 क्विंटल और नगरोटा बगवां केंद्र में 172 किसानों से 152.50 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं खरीदा गया। किसानों द्वारा लाए गए गेहूं की पहले नमी और गुणवत्ता की जांच की गई। इसके बाद सभी किसानों को रसीदें दी गईं और उनके बैंक खातों का विवरण दर्ज किया गया, ताकि भुगतान समय पर किया जा सके।
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जल्द किसानों के खातों में पहुंचेगी भुगतान की राशि
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी किसानों को सरकार द्वारा तय किए गए समर्थन मूल्य के अनुसार भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा। इससे किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिलेगी और वे अगली फसल की तैयारी बिना किसी वित्तीय परेशानी के कर सकेंगे। विभाग का कहना है कि पूरी भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
प्राकृतिक खेती को सरकार क्यों दे रही है बढ़ावा?
आत्मा परियोजना के परियोजना निदेशक डॉ. शशि पाल अत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि यह खेती केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कम होता है तथा पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचता है। इसके साथ ही लोगों को सुरक्षित और रसायन मुक्त अनाज उपलब्ध होता है। यही कारण है कि राज्य सरकार लगातार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए बेहतर समर्थन मूल्य और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।
प्राकृतिक खेती से किसानों और प्रदेश को क्या मिलेगा फायदा?
हिमाचल प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को देश में सबसे अधिक समर्थन मूल्य देने वाले राज्यों में शामिल है। सरकार प्राकृतिक मक्की पर 50 रुपये, प्राकृतिक गेहूं पर 80 रुपये और प्राकृतिक हल्दी पर 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को इसी तरह बेहतर बाजार, उचित मूल्य और सरकारी सहयोग मिलता रहा तो प्राकृतिक खेती का दायरा लगातार बढ़ेगा।
इससे किसानों की आय मजबूत होगी, खेती की लागत घटेगी, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार की यह पहल भविष्य में हिमाचल प्रदेश को प्राकृतिक खेती का मजबूत मॉडल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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