हिमाचल सरकार का नशे पर बड़ा वार, 13.28 करोड़ के नशीले पदार्थ नष्ट
हिमाचल सरकार का नशे पर बड़ा वार, 13.28 करोड़ के नशीले पदार्थ नष्ट

Post by : Himachal Bureau

June 27, 2026 12:42 p.m. 171

अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी निवारण दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार को एंटी-चिट्टा दिवस मनाया गया। इस दौरान राज्य सरकार ने नशे के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाई करते हुए प्रदेश के 10 अलग-अलग स्थानों पर लगभग 13.28 करोड़ रुपये मूल्य के जब्त नशीले पदार्थों को वैज्ञानिक तरीके से एक साथ नष्ट किया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई ताकि कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी रहे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन में मुख्य सचिव के.के. पंत ने इस राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की।

सरकार ने एक साथ नशीले पदार्थ क्यों नष्ट किए?

मुख्य सचिव के.के. पंत ने बताया कि प्रदेश सरकार ने 15 नवंबर 2025 को 'एंटी-चिट्टा जन आंदोलन' शुरू किया था। उसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए इस बार पूरे प्रदेश में एक ही समय पर जब्त नशीले पदार्थों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया। उनका कहना था कि इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल जब्त सामग्री को नष्ट करना नहीं, बल्कि समाज में यह स्पष्ट संदेश देना भी है कि हिमाचल में नशे के कारोबार के लिए कोई जगह नहीं है।

सरकारी नौकरी के लिए डोप टेस्ट क्यों होगा अनिवार्य?

राज्य सरकार ने नशे पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है। अब हिमाचल प्रदेश सरकार की नौकरियों के लिए चयनित अभ्यर्थियों का डोप टेस्ट अनिवार्य किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए आवश्यक मानक और प्रक्रिया तैयार कर रहा है। अधिसूचना जारी होने के बाद यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी सेवाओं में नशा मुक्त और जिम्मेदार कार्य संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।

ड्रग माफिया पर पुलिस कैसे कस रही है शिकंजा?

एडीजी सीआईडी एवं एसटीएफ प्रमुख ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई अब केवल छोटे स्तर के नशा तस्करों तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर मुख्य सरगनाओं तक पहुंच रही हैं। कांगड़ा और शिमला सहित कई जिलों में जांच के दौरान तस्करों के नेटवर्क और सप्लाई चेन का खुलासा किया गया है। पुलिस अब नशे के कारोबार से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर भी लगातार नजर रख रही है।

हिमाचल वित्तीय जांच में देश के अग्रणी राज्यों में क्यों शामिल है?

पुलिस अधिकारियों के अनुसार नशा तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए उनकी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई भी लगातार बढ़ाई गई है। इसी वजह से वित्तीय जांच और तस्करों की संपत्ति जब्त करने के मामलों में हिमाचल प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में गिना जा रहा है।

डीजीपी ने कानून व्यवस्था और सीमा सुरक्षा पर क्या कहा?

डीजीपी अशोक तिवारी ने कहा कि राज्यभर में चलाया गया यह अभियान ड्रग माफिया के लिए स्पष्ट संदेश है कि हिमाचल में नशे के कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और प्रदेश की कानून-व्यवस्था सामान्य बनी हुई है। पुलिस लगातार खुफिया एजेंसियों और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय बनाए हुए है।

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नशा मुक्त हिमाचल की दिशा में सरकार का अगला कदम

प्रदेश सरकार का कहना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से नशे की समस्या खत्म नहीं होगी। इसके लिए समाज, पंचायतों, युवाओं, शिक्षण संस्थानों और परिवारों की भागीदारी भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से नशा प्रभावित पंचायतों में जागरूकता बैठकों का आयोजन किया गया। सरकार का लक्ष्य कानून के साथ-साथ जनभागीदारी के माध्यम से हिमाचल को नशा मुक्त बनाना है। आने वाले समय में नशा तस्करी के खिलाफ और भी सख्त अभियान चलाए जाएंगे ताकि युवाओं को इस बुराई से बचाया जा सके।

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