Post by : Himachal Bureau
चंडीगढ़ के लिए गर्व का क्षण उस समय आया जब सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। सामाजिक सेवा और स्वच्छता के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को देखते हुए उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल किया गया।
स्वच्छता के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान
88 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू को सामाजिक कार्य श्रेणी में पद्मश्री दिया गया है। उन्होंने पुलिस सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद अपना अधिकांश समय स्वच्छता और जनजागरूकता के लिए समर्पित किया। पिछले करीब तीन दशकों से वह लगातार चंडीगढ़ की सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई करते रहे हैं। उनके इसी समर्पण ने उन्हें पूरे देश में अलग पहचान दिलाई।
कौन हैं इंदरजीत सिंह सिद्धू?
इंदरजीत सिंह सिद्धू पंजाब कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 6 जून 1938 को पंजाब के संगरूर जिले में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1961 में पंजाब पुलिस में सेवा शुरू की और बाद में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) के पद तक पहुंचे। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 1996 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने समाज सेवा का रास्ता चुना।
कैसे बने ‘झाड़ू योद्धा’?
सेवानिवृत्ति के बाद जब वह चंडीगढ़ में रहने लगे तो उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर फैली गंदगी परेशान करने लगी। उन्होंने केवल शिकायत करने के बजाय खुद सफाई शुरू कर दी। रोज सुबह वह साइकिल पर निकलते और सड़कों से कचरा इकट्ठा करते। समय के साथ लोगों ने उन्हें "झाड़ू योद्धा" के नाम से पहचानना शुरू कर दिया।
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शुरुआत में लोगों ने उड़ाया मजाक
जब एक पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सड़क पर झाड़ू लगाते और कचरा उठाते दिखाई देते थे, तब कई लोग उनका मजाक भी उड़ाते थे। लेकिन सिद्धू ने कभी इसकी परवाह नहीं की। उन्होंने अपना अभियान जारी रखा। धीरे-धीरे लोगों की सोच बदलने लगी और कई नागरिक भी सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने के लिए आगे आने लगे।
सोशल मीडिया पर भी मिली पहचान
इंदरजीत सिंह सिद्धू के काम को पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पर भी काफी सराहना मिली। उनके सफाई अभियान के वीडियो वायरल हुए और देशभर के लोगों ने उनकी प्रशंसा की। कई प्रमुख उद्योगपतियों और सामाजिक हस्तियों ने भी उनके प्रयासों को प्रेरणादायक बताया।
समाज के लिए दिया बड़ा संदेश
पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद भी इंदरजीत सिंह सिद्धू का कहना है कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। उनका मानना है कि हर नागरिक को अपने आसपास के वातावरण को साफ रखने में योगदान देना चाहिए। उन्होंने अपने काम से यह साबित किया है कि समाज में बदलाव लाने के लिए किसी बड़े पद की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है।
पद्मश्री सम्मान के साथ इंदरजीत सिंह सिद्धू ने चंडीगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उनका सफाई अभियान यह संदेश देता है कि व्यक्तिगत प्रयास भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। तीन दशक तक बिना किसी स्वार्थ के किया गया उनका काम आज देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक सम्मान के रूप में पहचाना गया है।
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