हिमाचल बना प्राकृतिक खेती के लिए MSP लागू करने वाला देश का पहला राज्य
हिमाचल बना प्राकृतिक खेती के लिए MSP लागू करने वाला देश का पहला राज्य

Post by : Khushi Joshi

Dec. 4, 2025 1:05 p.m. 597

धर्मशाला में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक खेती को नई दिशा देने में देशभर में अग्रणी बन चुका है। राज्य में पहली बार प्राकृतिक रूप से पैदा होने वाले कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय कर इसे आधिकारिक तौर पर लागू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को दोबारा खेती से जोड़ने के लिए सरकार जमीन पर काम कर रही है और इसके लिए बजट प्रावधान भी किया गया है। आत्मा परियोजना के माध्यम से बड़ी संख्या में लोग फिर से कृषि से जुड़ रहे हैं।

सीएम सुक्खू ने विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि यहां मक्की केवल बोई ही नहीं जाती, बल्कि सर्दियों में घर-घर में मक्की की रोटी बनाई और खाई भी जाती है। सरकार ने मक्की का MSP 30 से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति किलो किया है, गेहूं के लिए 60 रुपये और कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलो का मूल्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय की सराहना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा भी की गई है।

सुक्खू ने बताया कि मक्की के आटे को पैकिंग और एक्सपायरी डेट के साथ 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से उचित मूल्य दुकानों पर उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके अलावा ऊना में आलू की प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं, ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित बाजार मिल सके और उत्पादन का दायरा बढ़े।

सदन में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों को विभिन्न डिपो तक भेजा जा रहा है। जसवां-परागपुर से विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने शहद, दलिया, बेसन, घी सहित अन्य उत्पादों की खरीद को बढ़ाने के मुद्दे उठाए। इस पर मंत्री ने जानकारी दी कि फसल खरीद केंद्रों की संख्या और क्षमता बढ़ाने पर कार्य किया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्राकृतिक खेती की दिशा में पहल पूर्व सरकार ने शुरू की थी और इस पर निरंतर सुधार की आवश्यकता है।

सत्र के दौरान ऊना के विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने कर्मचारियों की बायोमीट्रिक हाज़िरी से जुड़ा सवाल उठाया और अधिकारियों द्वारा बार-बार जानकारी एकत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई। इस पर सरकार ने भरोसा दिया कि व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

राजस्व विभाग की ओर से मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि ठियोग क्षेत्र में धारा-118 के तहत अब तक 17 स्वीकृतियां प्रदान की गई हैं और इसमें पंचायतों को भी सक्षम बनाया गया है। उन्होंने कहा कि नियमों में कुछ और संशोधन जोड़ने की प्रक्रिया जारी है ताकि अनुमति प्रक्रिया पारदर्शी और सरल हो सके।

नेगी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में पटवारियों के 345 खाली पद जल्द भरे जाएंगे। वर्तमान में 2123 स्वीकृत पदों में केवल 628 पदों पर ही तैनाती है, जिससे राजस्व कार्य प्रभावित हो रहा है। छह महीने और तीन महीने के प्रशिक्षण समय को ध्यान में रखते हुए इन रिक्तियों को भरने के लिए प्रक्रिया तेज की जा रही है। साथ ही, सेटेलमेंट में हो रही देरी को कम करने के लिए भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हिम बस कार्ड को जनता के लिए पूरी तरह निशुल्क शुरू किया गया है और केवल कार्ड की लागत ली जा रही है। यह कार्ड पांच वर्ष के लिए मान्य होगा, ताकि निशुल्क यात्रा सुविधा का दुरुपयोग न हो और जरूरी पात्र श्रेणियों तक ही इसका लाभ पहुंचे।

हिमाचल सरकार का दावा है कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर राज्य में किसानों की आजीविका मजबूत, रोज़गार सृजन और बाजार विस्तार के नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं। MSP से जुड़ा यह कदम पूरे देश में एक उदाहरण स्थापित कर रहा है और आने वाले समय में अन्य राज्य भी हिमाचल की इस नीति से प्रेरणा ले सकते हैं।

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