वरिष्ठ समाजसेवी पंडित सुखदेव शास्त्री का निधन, नादौन क्षेत्र में शोक की लहर
वरिष्ठ समाजसेवी पंडित सुखदेव शास्त्री का निधन, नादौन क्षेत्र में शोक की लहर

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Feb. 16, 2026 1:52 p.m. 265

नादौन विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बदारन के अंतर्गत गांव भड़ोली-भगौर निवासी, हिमाचल गौशाला सेवा समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ समाजसेवी पंडित सुखदेव शास्त्री का शनिवार को 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका उपचार एम्स बिलासपुर में चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

21 मई 1946 को जन्मे पंडित सुखदेव शास्त्री प्रदेश भर में एक विद्वान शिक्षाविद्, लेखक और समाजसेवी के रूप में प्रसिद्ध थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई धार्मिक एवं सामाजिक विषयों पर पुस्तकें लिखीं और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

पंडित सुखदेव शास्त्री का पैतृक गांव पिपलू था, लेकिन अध्यापन कार्य के दौरान वे गौ-सेवा अभियान से जुड़े और भड़ोली-भगौर में गौशाला की स्थापना कर वहीं स्थायी रूप से बस गए। सरकारी सेवा में रहते हुए भी उनका अधिकांश समय समाज सेवा और धार्मिक गतिविधियों में ही व्यतीत होता था।

वर्ष 2000 में उन्होंने मात्र चार गऊवंश से श्री लक्ष्मी नारायण गौ सेवा समिति के नाम से गौशाला की स्थापना की। उनके अथक प्रयासों और समाज के सहयोग से आज यह गौशाला 120 से अधिक गऊवंश का पालन-पोषण कर रही है। यह गौशाला आज क्षेत्र में गौ-सेवा का प्रमुख केंद्र बन चुकी है।

पंडित सुखदेव शास्त्री ने हजारों श्रद्धालुओं को देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्राएं करवाईं। उन्होंने समाज के सहयोग से एक ट्रस्ट का गठन कर हरिद्वार में एक बड़ी धर्मशाला क्रय की, जो आज “हिमाचल धर्मशाला” के नाम से जानी जाती है। यहां हिमाचल से आने वाले यात्रियों के लिए निःशुल्क ठहरने की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है।

इसके अतिरिक्त बंगाणा के डोहगी संस्कृत कॉलेज की स्थापना में भी उनका विशेष योगदान रहा। इस संस्थान को क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। वे निर्धन, बेसहारा विधवाओं और बुजुर्गों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते थे।

पंडित सुखदेव शास्त्री अपने पीछे पत्नी, दो पुत्र—विपिन कुमार और विनोद कुमार शर्मा—तथा तीन पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

अंतिम संस्कार से पूर्व उनकी पार्थिव देह को गौशाला भड़ोली-भगौर ले जाया गया, जहां श्रद्धालुओं ने गौ-परिक्रमा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पश्चात धनेटा के शीतला में पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया गया।

उनके निधन पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू , पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और पूर्व विधायक विजय अग्निहोत्री सहित अनेक नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

अंतिम संस्कार के अवसर पर विजय अग्निहोत्री, वीरेंद्र कंवर, डॉ. अशोक शर्मा, रमेश शर्मा, मदन डोगरा सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों और क्षेत्रवासियों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

पंडित सुखदेव शास्त्री का संपूर्ण जीवन सादगी, सेवा और समर्पण का प्रतीक रहा। उन्होंने समाज, शिक्षा और धर्म के क्षेत्र में जो कार्य किए, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगे। उनका निधन समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका सादा जीवन, निःस्वार्थ सेवा और गौ-सेवा के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।

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