Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल प्रदेश के नादौन उपमंडल में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। अब नादौन उपमंडल के 11 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अर्थात सीबीएसई का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। यह निर्णय विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
रैल और जलाड़ी सीनियर सेकेंडरी स्कूल को भी सीबीएसई से संबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे पहले धनेटा, नादौन बॉयज, नादौन गर्ल्स, बदारन, अमलैहड़, बड़ा, बटराण, कांगू और गलोड़ स्कूल सीबीएसई से संबद्ध हो चुके हैं। अब इन सभी स्कूलों में आगामी शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होगा।
सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से इन स्कूलों में सीबीएसई की पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना और उन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर रूप से तैयार करना है।
सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होने से विद्यार्थियों को एक समान और मानकीकृत शिक्षा प्रणाली का लाभ मिलेगा। इससे न केवल उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि उन्हें देशभर में उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर भी प्राप्त होंगे।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्कूल शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रैल और जलाड़ी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने की सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी की जाएं। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि इन स्कूलों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं का स्तर उत्कृष्ट हो।
मुख्यमंत्री का मानना है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों को भी राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें।
अमलैहड़ में निर्माणाधीन डे बोर्डिंग स्कूल को भी नए शैक्षणिक सत्र से शुरू किया जाएगा। यह स्कूल पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
डे बोर्डिंग स्कूल में विद्यार्थियों के लिए पौष्टिक आहार, खेल सुविधाएं और समुचित मार्गदर्शन की व्यवस्था होगी। अन्य स्थानों पर भी निर्माणाधीन डे बोर्डिंग स्कूलों का कार्य तेजी से चल रहा है, जिससे भविष्य में और अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।
सरकार का लक्ष्य केवल पाठ्यक्रम बदलना नहीं है, बल्कि शिक्षा का समग्र विकास करना है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए उचित भवन व्यवस्था की जाएगी। जहां भवन निर्माण की आवश्यकता है, वहां पुराने भवनों की जगह नई बहुमंजिला इमारतें बनाई जाएंगी।
स्कूलों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। प्रत्येक स्कूल का अपना खेल मैदान होगा, जिससे विद्यार्थियों को खेलों में भी प्रोत्साहन मिलेगा। खेल और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में संतुलित विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार पूरे हिमाचल प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र से 140 स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। इनमें से 100 स्कूल पहले ही सीबीएसई से संबद्ध हो चुके हैं, जबकि 40 स्कूलों की संबद्धता की प्रक्रिया जारी है।
सरकार का लक्ष्य प्रदेश के 200 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करना है। यह कदम हिमाचल प्रदेश के शिक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
इन सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों का अलग लोगो और यूनिफॉर्म होगा। सभी स्कूलों के भवनों का रंग भी एक समान रखा जाएगा, ताकि उनकी एक विशिष्ट पहचान बन सके। यह व्यवस्था विद्यार्थियों में एकरूपता और अनुशासन की भावना विकसित करेगी।
सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूल भी निजी स्कूलों की तरह आधुनिक और आकर्षक दिखें, जिससे अभिभावकों का विश्वास बढ़े और वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए प्रेरित हों।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का उद्देश्य है कि हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी सीबीएसई की पढ़ाई का अवसर मिले। इससे विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ेगी और वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे।
विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होना एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। इससे ग्रामीण विद्यार्थियों को भी वही अवसर मिलेंगे जो शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को प्राप्त होते हैं।
नादौन उपमंडल के 11 स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होने से शिक्षा के स्तर में व्यापक सुधार की उम्मीद है। यह पहल न केवल विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत करेगी, बल्कि प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को भी नई दिशा देगी।
सरकार का यह कदम शिक्षा में गुणवत्ता, समानता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। आने वाले समय में इसका सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों, अभिभावकों और पूरे समाज पर देखने को मिलेगा।
नादौन और पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए यह निर्णय शिक्षा क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
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