हिमाचल में कम छात्र संख्या वाले 100 सरकारी स्कूलों को किया जाएगा मर्ज
हिमाचल में कम छात्र संख्या वाले 100 सरकारी स्कूलों को किया जाएगा मर्ज

Post by : Himachal Bureau

May 8, 2026 11:09 a.m. 1411

हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, संगठित और संसाधन आधारित बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में ऐसे करीब 100 सरकारी स्कूलों को मर्ज करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिनमें छात्रों की संख्या बहुत कम है, यानी पांच से भी कम विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।

शिक्षा विभाग ने इस संबंध में प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंप दी है। अब इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय आने वाले समय में लिया जा सकता है। विभाग का मानना है कि जिन स्कूलों में छात्र संख्या लगातार घट रही है, वहां संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है।

प्रदेश के कई प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां केवल दो से पांच विद्यार्थी ही शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि वहां नियमित रूप से शिक्षक तैनात हैं और भवनों के रखरखाव पर भी खर्च किया जा रहा है। ऐसे में सरकार का तर्क है कि इन विद्यालयों को नजदीकी बड़े स्कूलों में मर्ज करने से शिक्षा प्रणाली अधिक मजबूत और प्रभावी बन सकती है।

सरकार का कहना है कि बड़े स्कूलों में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। वहां पर्याप्त शिक्षक, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई का स्तर बेहतर हो सकता है। इससे विद्यार्थियों को एक प्रतिस्पर्धी माहौल भी मिलेगा।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिन स्कूलों के मर्जर की योजना बनाई गई है, वहां के छात्रों के लिए परिवहन सुविधा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि उनकी शिक्षा प्रभावित न हो। जरूरत के अनुसार छात्रों को नजदीकी स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा।

इससे पहले भी शिक्षा विभाग कम छात्र संख्या वाले कई स्कूलों का मर्जर कर चुका है। अब नई सूची में शामिल करीब 100 स्कूलों का विस्तृत सर्वे किया जा रहा है, जिसमें भौगोलिक स्थिति, दूरी और छात्र संख्या को ध्यान में रखा जा रहा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस कदम से शिक्षकों की कमी वाले बड़े स्कूलों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि उपलब्ध स्टाफ का बेहतर और संतुलित उपयोग किया जा सकेगा। इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था अधिक संगठित और मजबूत होगी।

हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई अभिभावकों और पंचायत प्रतिनिधियों ने चिंता जताई है कि छोटे बच्चों को दूर के स्कूलों में जाना पड़ेगा, जिससे उन्हें परेशानी हो सकती है। खासकर सुरक्षा और दैनिक आवागमन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

वहीं कुछ शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार परिवहन, सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं की पूरी व्यवस्था करती है, तो यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले दिनों में सरकार इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय ले सकती है, जिससे प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव संभव है।

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