संविधान और लोकतंत्र की स्थिति पर पूर्व विधायक प्रवीन कुमार का बड़ा बयान
संविधान और लोकतंत्र की स्थिति पर पूर्व विधायक प्रवीन कुमार का बड़ा बयान

Author : Rajesh Vyas

May 8, 2026 4:22 p.m. 112

पूर्व विधायक प्रवीन कुमार ने देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान तैयार करते समय बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शायद कभी यह कल्पना नहीं की होगी कि भविष्य में राजनीति का स्तर इस तरह गिर सकता है।

उन्होंने कहा कि आज देश में कई ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो लोकतंत्र की गरिमा और संविधान की मूल भावना पर सवाल खड़े करती हैं। प्रवीन कुमार ने कहा कि कुछ राज्यों में ऐसे आरोप देखने को मिल रहे हैं, जहां मुख्यमंत्री विधानसभा में अनुचित स्थिति में पहुंचने को लेकर विवादों में घिर जाते हैं। वहीं कुछ मामलों में दोषी ठहराए जाने के बावजूद भी पद छोड़ने के बजाय सत्ता से जुड़े रहने की कोशिशें लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करती हैं।

पूर्व विधायक ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य जनता की सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना होना चाहिए, लेकिन आज कई नेता व्यक्तिगत स्वार्थ और सत्ता बचाने की राजनीति में अधिक व्यस्त दिखाई देते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि इस तरह की घटनाएं जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं।

उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद भी पद पर बने रहने की कोशिशें लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ मानी जाती हैं। उनके अनुसार लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होना चाहिए और जनप्रतिनिधियों को उसकी गरिमा बनाए रखनी चाहिए।

प्रवीन कुमार ने संसद की कार्यवाही पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक सदनों में लगातार हंगामा, शोर-शराबा और अमर्यादित व्यवहार देखने को मिल रहा है। इससे लोकतंत्र की छवि पर नकारात्मक असर पड़ता है और जनता के बीच गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभा जैसे मंचों पर गंभीर मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन कई बार बहस की जगह विवाद और विरोध अधिक दिखाई देता है। इससे आम जनता की उम्मीदों को झटका लगता है।

पूर्व विधायक ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को आत्मचिंतन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने जिस मजबूत और आदर्श लोकतंत्र की कल्पना की थी, उसे साकार करने के लिए राजनीतिक दलों और नेताओं को जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।

उन्होंने युवाओं से भी लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने और संविधान के प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील की। प्रवीन कुमार ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब जनप्रतिनिधि मर्यादा, नैतिकता और जवाबदेही के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे।

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