Author : Rajesh Vyas
हिमाचल प्रदेश में नशे पर रोक लगाने के लिए राज्य स्तर पर प्रयास तेज किए जा रहे हैं। धर्मशाला में आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम में उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में लागू Anti Chitta Model के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं और इसकी चर्चा अन्य राज्यों में भी हो रही है।
धर्मशाला में आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम
स्कूल शिक्षा बोर्ड के सभागार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, स्वास्थ्य विभाग और गूंजन संस्था के संयुक्त सहयोग से नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस-2026 तथा टीबी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि केवल सिंह पठानिया ने लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास होने वाली नशे से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दें और युवाओं को इस बुराई से बचाने में सहयोग करें।
क्या है Anti Chitta Model?
उन्होंने बताया कि चिट्टे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पंचायत स्तर तक सर्वे और मैपिंग की गई है। हिमाचल देश का पहला राज्य है, जहां पंचायतों को चिट्टे के प्रभाव के आधार पर रेड, येलो और ग्रीन श्रेणियों में बांटा गया है। सर्वे के अनुसार 234 पंचायतों को रेड श्रेणी में रखा गया है, जहां पुलिस निगरानी बढ़ाकर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
पठानिया ने कहा कि इस पहल के तहत नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। PIT-NDPS Act के तहत 174 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। इसके साथ ही नशे की लत से जूझ रहे लोगों के इलाज और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों को बेहतर बनाने की योजना अंतिम चरण में है।
112 हेल्पलाइन से मिल रही सहायता
उन्होंने कहा कि अब कई अभिभावक बिना किसी झिझक के टोल फ्री नंबर 112 पर संपर्क कर अपने बच्चों को नशे की लत से बाहर निकालने के लिए सहायता मांग रहे हैं। उनका मानना है कि समय पर इलाज और सही मार्गदर्शन से कई युवाओं का भविष्य बचाया जा सकता है।
कार्यक्रम में गूंजन संस्था के निदेशक विजय कुमार ने नशे के दुष्प्रभाव और बचाव के उपायों पर जानकारी दी। वहीं विभिन्न नर्सिंग संस्थानों के विद्यार्थियों ने रोल प्ले, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर मेकिंग और भाषण प्रतियोगिताओं के माध्यम से टीबी के लक्षण, समय पर जांच और पूरा इलाज कराने का संदेश दिया। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया।
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कार्यक्रम के अंत में केवल सिंह पठानिया ने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। उन्होंने विश्वास जताया कि लोगों के सहयोग और जागरूकता से हिमाचल को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य जरूर पूरा होगा।
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