मुख्यमंत्री सुक्खू के नाम से फर्जी बयान वायरल, साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की
मुख्यमंत्री सुक्खू के नाम से फर्जी बयान वायरल, साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की

Post by : Himachal Bureau

April 7, 2026 12:24 p.m. 152

हिमाचल प्रदेश में एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नाम का दुरुपयोग करते हुए एक फर्जी और भ्रामक बयान सोशल मीडिया पर फैलाया गया। इस घटना ने न केवल राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया, बल्कि आम लोगों के बीच भ्रम और गलत जानकारी भी फैलाई। मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ और शिमला स्थित साइबर अपराध थाना ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिमला के निवासी और कांग्रेस से जुड़े नेता बलदेव ठाकुर ने इस मामले को लेकर पुलिस में लिखित शिकायत दी। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि “मुन्नू ठाकुर” नाम से चलाए जा रहे एक फेसबुक खाते से एक पोस्ट साझा की गई, जिसमें मुख्यमंत्री के नाम से एक कथित बयान लिखा गया था। इस बयान में कहा गया था कि कांग्रेस पार्टी एक सागर के समान है और उसमें एक बूंद का कोई महत्व नहीं होता, साथ ही यह भी लिखा गया कि विक्रमादित्य सिंह जब चाहें भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

शिकायतकर्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री ने इस प्रकार का कोई बयान कभी नहीं दिया है। उन्होंने इस पोस्ट को पूरी तरह झूठा, भ्रामक और लोगों को गुमराह करने वाला बताया। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह की पोस्ट का उद्देश्य प्रदेश के राजनीतिक वातावरण को खराब करना और लोगों के बीच गलतफहमी फैलाना है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर अपराध थाना शिमला ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित फेसबुक खाते के संचालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब उस व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है, जिसने इस फर्जी पोस्ट को तैयार किया और उसे सोशल मीडिया पर फैलाया।

जांच के दौरान पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस फर्जी बयान को फैलाने के पीछे किसका हाथ है और इसका उद्देश्य क्या था। यह भी जांच का विषय है कि क्या यह कार्य किसी एक व्यक्ति द्वारा किया गया या इसके पीछे कोई संगठित समूह शामिल है।

पुलिस विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए इसकी जांच एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी है, जो उप पुलिस अधीक्षक स्तर के हैं। वे अब तकनीकी साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं, ताकि दोषी व्यक्ति तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि आज के समय में सोशल मीडिया का उपयोग जितना आसान है, उसका दुरुपयोग भी उतनी ही तेजी से किया जा सकता है। बिना सत्यापन के किसी भी जानकारी को साझा करना समाज में भ्रम और तनाव पैदा कर सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की जानकारी या संदेश को आगे भेजने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। विशेष रूप से जब किसी बड़े नेता या संवेदनशील विषय से जुड़ी बात हो, तो सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है।

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