Post by : Khushi Joshi
दिल्ली में हुए हालिया कार ब्लास्ट के बाद केंद्र सरकार ने हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की फंडिंग और वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं। ब्लास्ट मामले की जांच के दौरान कुछ संदिग्ध व्यक्तियों का यूनिवर्सिटी से जुड़ाव सामने आने के बाद केंद्र ने इस दिशा में और कड़े कदम उठाने का फैसला किया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अब यूनिवर्सिटी की आय, दान, बाहरी फंडिंग, सहयोगी संस्थाओं से हुए लेन-देन और पिछले वर्षों की वित्तीय गतिविधियों की फोरेंसिक जांच करवाई जाएगी। जांच एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे ना सिर्फ फंडिंग के स्रोतों की समीक्षा करें, बल्कि यह भी जांचें कि कहीं शैक्षणिक ढांचे का दुरुपयोग तो नहीं किया गया।
कार ब्लास्ट की जांच में कुछ ऐसे नाम सामने आए, जो अतीत में अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े रहे थे। इस संबंध के आधार पर एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं यूनिवर्सिटी का ढांचा, उसके संसाधन या परिसर में मौजूद सुविधाओं का दुरुपयोग तो नहीं हुआ।
सूत्र बताते हैं कि यूनिवर्सिटी के—
बैंक खातों,
विदेशी फंडिंग की जानकारी,
ट्रस्ट और संस्थागत निवेश,
छात्रावास और विभागीय गतिविधियों,
तथा पिछले 5–7 वर्षों की लेखा जानकारी
की भी जांच की जाएगी।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि कोई भी शिक्षा संस्थान अपने अधिकार और संसाधनों का दुरुपयोग करता पाया गया तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी।
देश में बढ़ते निजी विश्वविद्यालयों के बीच यह मामला शिक्षा संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यूनिवर्सिटी पर मान्यता संबंधी दस्तावेजों को लेकर भी प्रश्न बने हुए थे, जिसके चलते संबंधित एजेंसियों ने बीते समय में नोटिस जारी किए थे।
ये सभी परिस्थितियाँ मिलकर इस जांच को और महत्वपूर्ण बनाती हैं।
जांच का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि—
किसी भी शिक्षा संस्थान को गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल न किया जाए।
फंडिंग का स्रोत और उपयोग पूरी तरह पारदर्शी हो।
छात्रों और समाज को सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण मिले।
सरकार का मानना है कि भारत जैसे बड़े देश में शिक्षा संस्थान सिर्फ पढ़ाई का माध्यम ही नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और कानून व्यवस्था के प्रति भी जवाबदेह हैं।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर शुरू हुई यह जांच देशभर के निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों के लिए एक चेतावनी और निर्देश दोनों है।
सरकार यह दिखाना चाहती है कि कोई भी संस्थान कानून से ऊपर नहीं है और किसी प्रकार की संदिग्ध वित्तीय गतिविधि अनदेखी नहीं की जाएगी।
जांच एजेंसियों की रिपोर्ट आने के बाद—
यूनिवर्सिटी पर जुर्माना,
मान्यता पर रोक,
प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कदम,
या आवश्यक सुधारों के निर्देश
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