Post by : Himachal Bureau
नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को मजबूती के साथ रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य विषय विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास रहा, जिसमें राज्यों के विकास और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि हिमाचल प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, लेकिन कई वित्तीय चुनौतियों का सामना भी कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से हिमाचल की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सहयोग प्रदान करने की मांग की।
राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से बढ़ी आर्थिक चुनौती
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने बताया कि राज्य को मिले आर्थिक सहयोग से विकास कार्यों की पूरी भरपाई नहीं हो पा रही है। इसी कारण उन्होंने केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक सहायता बढ़ाने की मांग की ताकि प्रदेश में विकास परियोजनाओं को गति मिल सके।
उन्होंने सुझाव दिया कि हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों और जीएसटी व्यवस्था के कारण हुए राजस्व नुकसान का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए। यह समिति विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को सौंपे ताकि राज्य को उसका उचित अधिकार मिल सके।
पर्यावरण संरक्षण के बदले उचित सहायता की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय क्षेत्र है। प्रदेश के जंगल, जल स्रोत और प्राकृतिक संसाधन पूरे देश को लाभ पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न अध्ययनों के अनुसार हिमाचल पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से देश को बड़ी पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान कर रहा है, लेकिन इसके अनुरूप आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली मुफ्त बिजली के मामले में भी राज्य को उसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा। इसके अलावा कुछ लंबित वित्तीय देनदारियों का भुगतान भी अभी तक नहीं हुआ है, जिससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
आपदा प्रभावित प्रदेश के लिए विशेष पैकेज की जरूरत
मुख्यमंत्री ने बैठक में प्राकृतिक आपदाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में हिमाचल प्रदेश को भारी वर्षा, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण व्यापक नुकसान झेलना पड़ा है। इसके बावजूद प्रदेश को अपेक्षित आर्थिक सहायता अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां अलग होती हैं और यहां विकास कार्यों की लागत भी अधिक होती है। ऐसे में विशेष आर्थिक सहायता और दीर्घकालिक योजनाओं की आवश्यकता है ताकि आपदा प्रभावित क्षेत्रों का तेजी से पुनर्निर्माण किया जा सके।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्धियां गिनाईं
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने साक्षरता, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। प्रदेश लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।
उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार कल्याण कार्यक्रमों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बच्चों के पोषण और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
हरित ऊर्जा और पर्यटन विकास पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश आने वाले वर्षों में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, बैटरी भंडारण और अन्य आधुनिक परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में सहयोग की भी मांग की।
इसके साथ ही उन्होंने पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बेहतर हवाई संपर्क की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि प्रदेश में हवाई सुविधाओं का विस्तार होता है तो देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
नशे के खिलाफ अभियान और तकनीक आधारित शासन पर जोर
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चल रहे नशा विरोधी अभियान की जानकारी भी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है और इस दिशा में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डेटा प्रबंधन और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को शासन में शामिल करने की जरूरत पर भी बल दिया। उनका कहना था कि तकनीक आधारित निर्णय प्रणाली से योजनाओं के बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकते हैं।
नीति आयोग की इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के आर्थिक, पर्यावरणीय, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस बैठक को हिमाचल के हितों की प्रभावी पैरवी के रूप में देखा जा रहा है। अब प्रदेश की नजर केंद्र सरकार की आगामी नीतियों और संभावित निर्णयों पर टिकी हुई है, जिनका सीधा असर हिमाचल के विकास और भविष्य की योजनाओं पर पड़ सकता है।
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