Post by : Himachal Bureau
शिमला में आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक समारोह के समापन अवसर पर कला, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का अनूठा संगम देखने को मिला। कालीबाड़ी मंदिर सभागार में आयोजित इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया। समारोह के समापन अवसर पर राज्यपाल कविंदर गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने कला जगत से जुड़े कलाकारों तथा आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता में निहित है और कला उस विविधता को एक सूत्र में पिरोने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से यह संस्था देशभर के कलाकारों को एक मंच प्रदान कर रही है, जहां विभिन्न भाषाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासतों का आदान-प्रदान होता है। ऐसे आयोजन न केवल कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देते हैं बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक जागरूकता को भी मजबूत करते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल परंपराओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह देश की आत्मा है। इसे जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में कलाकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कला समाज को संवेदनशील बनाती है और लोगों को आपस में जोड़ने का कार्य करती है।
कार्यक्रम में देश के 18 राज्यों से आए 800 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया। विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने अपनी लोक परंपराओं, नृत्य शैलियों और सांस्कृतिक धरोहर को मंच पर जीवंत किया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
राज्यपाल ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए समर्पण और निरंतर अभ्यास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन नाटक प्रतियोगिता और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समारोह के दौरान कला क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दो वरिष्ठ कलाकारों को प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि कलाकार समाज के सच्चे प्रेरणास्रोत होते हैं और उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनती हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश और विशेष रूप से शिमला के साथ संस्था के लंबे जुड़ाव की भी सराहना की। उनके अनुसार यह संबंध वर्षों से राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समन्वय को मजबूत करने का कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित कलाकारों और दर्शकों ने भी इस आयोजन को कला महोत्सव का शानदार उदाहरण बताया। समापन समारोह में अनेक गणमान्य व्यक्ति, कला प्रेमी, सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे। पूरे आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि कला और संस्कृति समाज को जोड़ने की सबसे बड़ी शक्ति है।
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