Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र से एक राहत और उपलब्धि वाली खबर सामने आई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर के चिकित्सकों ने बेहद जटिल शल्य चिकित्सा करते हुए एक मरीज के पूरी तरह कट चुके हाथ को सफलतापूर्वक दोबारा जोड़ दिया। करीब सात घंटे तक चली इस सर्जरी में चिकित्सकों ने न केवल हड्डियों को जोड़ा, बल्कि कटी हुई धमनियों, नसों और टेंडन की भी सूक्ष्म मरम्मत की। चिकित्सकों की इस सफलता को प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार कुल्लू जिले में खेतों में काम करने के दौरान एक व्यक्ति का हाथ तेजधार औजार की चपेट में आ गया। हादसा इतना गंभीर था कि उसका हाथ पूरी तरह कट गया। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने घायल को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार के बाद मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा के लिए एम्स बिलासपुर भेजा गया। समय पर अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना देरी किए उपचार की प्रक्रिया शुरू की।
एम्स बिलासपुर पहुंचने पर मरीज की स्थिति का चिकित्सकीय मूल्यांकन किया गया। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने आपातकालीन सर्जरी का निर्णय लिया। इस दौरान चिकित्सकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कटे हुए हाथ को दोबारा जोड़कर उसमें रक्त प्रवाह और कार्यक्षमता बनाए रखना था। करीब सात घंटे तक चली जटिल शल्य चिकित्सा के दौरान हड्डियों को सही स्थिति में जोड़ने के साथ-साथ हाथ में मौजूद महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं, नसों और टेंडन की बारीकी से मरम्मत की गई। यह प्रक्रिया बेहद सावधानी और सूक्ष्मता की मांग करती है, क्योंकि हाथ को दोबारा जोड़ने के बाद उसमें रक्त का प्रवाह बहाल करना और ऊतकों को सुरक्षित रखना उपचार की सफलता के लिए बेहद जरूरी होता है।
इस Plastic Surgery के दौरान चिकित्सकों ने कटे हुए हिस्से को केवल हड्डियों के स्तर पर जोड़ने तक सीमित नहीं रखा। हाथ की कटी हुई धमनियों और नसों को भी सूक्ष्म तकनीक के माध्यम से जोड़ा गया। इसके साथ ही टेंडन की मरम्मत की गई, ताकि आगे चलकर हाथ की गतिविधियों और कार्यक्षमता को बचाया जा सके। ऐसे मामलों में समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि कटे हुए अंग को उचित समय के भीतर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो उसे बचाने की संभावना बढ़ जाती है। इसी वजह से मरीज को स्थानीय अस्पताल से तुरंत उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्र पहुंचाना उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
सर्जरी पूरी होने के बाद भी चिकित्सकों की जिम्मेदारी खत्म नहीं हुई। मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। चिकित्सकीय टीम जुड़े हुए हाथ में रक्त प्रवाह और अन्य महत्वपूर्ण संकेतकों की निगरानी कर रही है, ताकि किसी तरह की जटिलता होने पर तुरंत उपचार किया जा सके। Microvascular Surgery और इस तरह की जटिल पुनर्निर्माण सर्जरी में ऑपरेशन के बाद की निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी स्वयं सर्जरी।
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एम्स बिलासपुर में हुई यह सफल सर्जरी हिमाचल प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। पहले गंभीर चोटों और कटे हुए अंगों के मामलों में मरीजों को प्रदेश से बाहर बड़े चिकित्सा संस्थानों का रुख करना पड़ता था। अब राज्य में ही विशेषज्ञ चिकित्सकों और अत्याधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता से ऐसे जटिल मामलों के उपचार की संभावनाएं बढ़ी हैं। एम्स बिलासपुर की इस सफलता ने AIIMS Bilaspur, Plastic Surgery, Microsurgery, Hand Surgery, Microvascular Surgery और Himachal Health News से जुड़े चिकित्सा क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई है। समय पर उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम और आधुनिक चिकित्सा तकनीक के संयुक्त प्रयास से मरीज के कटे हुए हाथ को दोबारा जोड़ने में सफलता मिली। यह उपलब्धि न केवल मरीज और उसके परिवार के लिए राहत की खबर है, बल्कि हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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