Author : Rajesh Vyas
पालमपुर, 25 सितंबर: उद्यान विभाग हिमाचल प्रदेश के मशरूम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (MDP), पालमपुर की ओर से किसानों के लिए पांच दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण द हंस फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित द हंस आजीविका परियोजना, भवारना के सहयोग से हुआ। प्रशिक्षण में लंबागांव और सुल्लह विकास खंडों से चयनित करीब 47 किसानों ने भाग लिया।
पांच दिनों तक चले प्रशिक्षण में किसानों को मशरूम की विभिन्न प्रजातियों, उत्पादन के लिए जरूरी परिस्थितियों और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन की तकनीकों की जानकारी दी गई। किसानों को कक्षा व्याख्यान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया समझाई गई। प्रशिक्षण के दौरान उत्पादन प्रबंधन, स्वच्छता, रोग और कीट प्रबंधन तथा मशरूम उत्पादन की व्यावसायिक संभावनाओं पर भी जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने किसानों को केवल मशरूम उत्पादन तक सीमित न रहने की सलाह देते हुए प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और मार्केटिंग की संभावनाओं पर भी ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों की तकनीकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया और मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार तथा अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपनाने की संभावनाओं के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में उप निदेशक उद्यान, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पालमपुर, रंजना गुप्ता, MDP पालमपुर के विषय विशेषज्ञ डॉ. हितेंद्र पटियाल, फल डिब्बाबंदी इकाई नगरेटा के विषय विशेषज्ञ सुरेश नेगी तथा द हंस फाउंडेशन के विषय विशेषज्ञ अरुण नेगी और चेतना शर्मा सहित विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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प्रशिक्षण के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि रंजना गुप्ता ने प्रशिक्षण में शामिल किसानों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए। किसानों ने प्रशिक्षण के दौरान मिली तकनीकी जानकारी और व्यावहारिक अनुभव भी साझा किए। कई किसानों ने भविष्य में मशरूम उत्पादन को व्यावसायिक स्तर पर अपनाने में रुचि जताई।
उद्यान विभाग के अनुसार द हंस आजीविका परियोजना और MDP पालमपुर की ओर से अब तक कुल 170 किसानों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना और मशरूम उत्पादन के माध्यम से स्वरोजगार तथा अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध करवाना है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
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