Post by : Shivani Kumari
जेमी डाइमन, जेपी मॉर्गन चेज़ के सीईओ, ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभावों के बारे में गहरी समझ दी है। वे मानते हैं कि आने वाले 20 से 40 वर्षों के भीतर विकसित देशों में एआई की मदद से कार्यसप्ताह घटकर लगभग तीन दिन और आधे दिन का हो जाएगा। इसका मुख्य कारण एआई द्वारा दैनिक, दोहराए जाने वाले और समय-साध्य कार्यों को संभालना है, जिससे उत्पादकता में पर्याप्त बढ़ोतरी होगी और समान कार्य को कम समय में पूरा किया जा सकेगा।
जेपी मॉर्गन ने एआई को अपने संचालन में एक प्रमुख तकनीक के रूप में अपनाया है। इस समय बैंक के लगभग 2000 कर्मचारी एआई सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जबकि 1.5 लाख कर्मचारी आंतरिक दस्तावेजों और कार्यों के लिए बड़े भाषा मॉडल का नियमित उपयोग कर रहे हैं। बैंक के कई कार्य जैसे धोखाधड़ी की जांच, कानूनी समीक्षा, और विपणन अनुकूलन एआई के जरिए किये जा रहे हैं। इस निवेश पर बैंक को हर साल लगभग 2 अरब डॉलर की लागत बचत भी हो रही है, जो बैंक के लिए इस तकनीक की उपयोगिता का प्रमाण है।
डाइमन ने स्पष्ट किया है कि हालांकि एआई से काम के घंटे कम होंगे, लेकिन इस संक्रमणकाल में नौकरियों में कटौती अनिवार्य होगी। उन्होंने आगाह किया कि सरकारों और कंपनियों को इस बदलाव के लिए चल रहे कर्मचारियों को पुनःप्रशिक्षण प्रदान करना, आय सहायता देना, और विमुक्त कर्मचारियों के लिए पुनःस्थापन के विकल्प खोजने होंगे, अन्यथा सामाजिक अशांति हो सकती है। वे कहते हैं कि लोग अब वास्तविकता से आँखें नहीं हटाएं क्योंकि तकनीकी क्रांति की यह लहर बड़ी और अपरिवर्तनीय है।
डाइमन के अनुसार, एआई का आर्थिक मॉडल इंटरनेट युग से भिन्न है क्योंकि यह पूंजी-गहन और शक्ति-केंद्रित है। इसलिए निवेशकों को हर नए एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर या प्रोजेक्ट का मूल्यांकन सावधानीपूर्वक करना चाहिए। वे यह भी मानते हैं कि एआई की सहायता से काम की गुणवत्ता और जीवनस्तर सुधरेगा, जिससे तीन दिन आधे दिन की कार्यसप्ताह जैसी व्यवस्थाएं संभव हो पाएंगी।
अन्य तकनीकी दिग्गज जैसे बिल गेट्स और ज़ूम के सीईओ भी इसी दिशा में सकारात्मक हैं, जो मानते हैं कि एआई आने वाले समय में कम काम के घंटों में बेहतर आउटपुट देने में सक्षम होगा।
समग्र रूप से, जेमी डाइमन की यह भविष्यवाणी एआई के व्यावसायिक, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को समेटे हुए है—यह बताते हुए कि कैसे इस तकनीक से जीवन सार्थक रूप से बदल सकता है, परन्तु इसके लिए उचित नियोजन और नीति निर्माण आवश्यक है ताकि संसाधन और रोजगार सुरक्षित रह सकें।
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