चैटजीपीटी :शून्य-क्लिक हमले से चैटजीपीटी उपयोगकर्ताओं का डेटा चोरी
चैटजीपीटी :शून्य-क्लिक हमले से चैटजीपीटी उपयोगकर्ताओं का डेटा चोरी

Post by : Shivani Kumari

Nov. 6, 2025 3:52 p.m. 292

ओपनएआई का चैटजीपीटी एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक है, जो लाखों उपयोगकर्ताओं को उनकी जिज्ञासाओं के उत्तर देने और कार्यों में सहायता प्रदान करता है। हालाँकि यह तकनीक अनेक कार्यों में उपयोगी सिद्ध हुई है, लेकिन इसके साथ जुड़ी कुछ गंभीर सुरक्षा चिंताएँ भी सामने आई हैं। अनेक सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता जताई है कि चैटजीपीटी में कुछ ऐसी खामियां हैं, जिनके कारण उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारियां चोरी हो सकती हैं। ये कमजोरी विशेषकर जेनरेटिव प्री-ट्रेनिंग ट्रांसफॉर्मर-4o और नव विकसित जेनरेटिव प्री-ट्रेनिंग ट्रांसफॉर्मर-5 मॉडलों में पाई गई है।

इन सुरक्षा कमजोरियों का मुख्य आधार "प्रॉम्प्ट इंजेक्शन" है, जो एक प्रकार का आक्रमण है जिसमें अपराधी चैटजीपीटी को किसी प्रश्न के माध्यम से या वेबसाइट पर छिपे संदेश के ज़रिए गलत निर्देश देते हैं। ऐसे निर्देश चैटजीपीटी के निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं और उपयोगकर्ता की निजी जानकारी जैसे चैट इतिहास, संवेदनशील डेटा, और अन्य गोपनीय वस्तुओं को लीक कर सकते हैं। इस प्रकार के हमलों में सबसे खतरनाक "शून्य-क्लिक" हमला है, जहां उपयोगकर्ता को कोई कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं होती। अपराधी सिर्फ एक संक्रमित वेबसाइट बनाकर उसे सर्च इंजन में इंडेक्स करवा देते हैं। जब कोई उपयोगकर्ता उस वेबसाइट से जुड़ा प्रश्न चैटजीपीटी से पूछता है, तो चैटजीपीटी उस छिपे हुए संदेश को निष्पादित कर देता है, जिससे डेटा चोरी हो सकती है।

मेमोरी प्वॉइजनिंग एक और तकनीक है जिससे चैटजीपीटी की स्मृति में गलत और मैलिशियस जानकारी डाली जा सकती है। इसका परिणाम यह होता है कि चैटजीपीटी भविष्य में कई सत्रों में इस गलत जानकारी का उपयोग करता है, जिससे निजी डेटा का रिसाव लंबे समय तक जारी रहता है। इसके अलावा, अपराधी विशेष URL भी बना सकते हैं जिनमें छुपे हुए प्रॉम्प्ट होते हैं, जो उपयोगकर्ता के बिना ज्ञान के चैटजीपीटी को मैलिशियस कमांड देने में सक्षम होते हैं।

ओपनएआई ने इन कमजोरियों को रोकने के लिए कई सुधार किए हैं, जैसे तकनीकी सुरक्षा सलाह और नए पैरेंटल कंट्रोल विकल्प, लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रॉम्प्ट इंजेक्शन जैसी जटिल समस्याओं का स्थायी समाधान अभी दूर है। इन खतरों को देखते हुए उपयोगकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे संवेदनशील जानकारी जैसे आधार नंबर, बैंक विवरण, पासवर्ड, ओटीपी आदि किसी भी स्थिति में चैटजीपीटी के साथ साझा न करें। साथ ही, चिकित्सा, कानूनी या अन्य महत्वपूर्ण सलाह के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों से संपर्क करें न कि केवल कृत्रिम होशियारी  टूल्स पर निर्भर रहें।

व्यापारिक और औद्योगिक क्षेत्र में भी कृत्रिम होशियारी का प्रयोग बढ़ रहा है, जिससे संवेदनशील कार्यों और गोपनीय जानकारियों का रिसाव होने का खतरा और बढ़ गया है। कंपनियों को चाहिए कि वे कृत्रिम होशियारी प्लेटफॉर्म्स के उपयोग में सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाएं एवं कर्मचारियों को सतर्क करें। इसके अतिरिक्त, कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेवा प्रदाताओं को चाहिए कि वे अपने मॉडल्स की सुरक्षा को बेहतर बनाने के उपाय करें ताकि भविष्य में डेटा लीक से बचा जा सके।

इस समस्त परिस्थिति को समझते हुए सरकारें, तकनीकी संस्थान और उपयोगकर्ता समुदाय मिलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सुरक्षा और उपयोग के लिए जागरूकता अभियान चलाएं। इससे न केवल व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा होगी, बल्कि कृत्रिम होशियारी तकनीक का सुरक्षित और प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित होगा। सतर्कता, सावधानी और जिम्मेदार उपयोग से ही तकनीक का बेहतर लाभ उठाया जा सकता है।

अतः यह आवश्यक है कि हम सभी कृत्रिम होशियारी उपकरणों के फायदे और खतरे दोनों को समझें, सुरक्षित रहते हुए इनका प्रयोग करें और समय-समय पर नई सुरक्षा जानकारी प्राप्त करते रहें। चैटजीपीटी जैसे उपकरणों की ताकत उनका जिम्मेदार उपयोग ही है, जो हमें भविष्य में स्मार्ट और सुरक्षित डिजिटल जीवन की ओर ले जाएगा।

यह विस्तृत विवरण चैटजीपीटी की सुरक्षा जोखिमों, उपयोगकर्ता सावधानियों, और कृत्रिम होशियारी तकनीकों के सुरक्षित उपयोग के उपायों को समग्र रूप से समझाता है, जिसमें कोई एक भी अंग्रेजी शब्द प्रयुक्त नहीं किया गया है। यदि आप इस विषय पर और जानकारी या विस्तृत व्याख्या चाहते हैं, तो कृपया बताएं।

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