ऊना में बहडाला पंचायत घर में नगर एवं ग्राम योजना विभाग का जागरूकता शिविर आयोजित
ऊना में बहडाला पंचायत घर में नगर एवं ग्राम योजना विभाग का जागरूकता शिविर आयोजित

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Feb. 2, 2026 11:42 a.m. 154

पंचायतों में सुनियोजित एवं संतुलित विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उप-मंडलीय नगर एवं ग्राम योजना कार्यालय, ऊना ने शनिवार को बहडाला पंचायत घर के सभागार में एक विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किया। यह शिविर सहायक नगर योजनाकार ऊना निर्मल सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। शिविर में क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों के प्रधान, उप-प्रधान, पंचायत सचिव और वार्ड सदस्य शामिल हुए, जिन्होंने योजना एवं विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

शिविर के दौरान निर्मल सिंह ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों को हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना अधिनियम, 1977 के प्रावधानों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक पंचायत और वार्ड में आम जनता को इन नियमों के प्रति जागरूक करना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण रोका जा सके और क्षेत्र का विकास योजनाबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुनियोजित विकास केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है, ताकि पर्यावरण संतुलित और संरक्षित रहे।

निर्मल सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकासात्मक गतिविधियों के लिए अधिनियम के तहत प्रदान की गई छूट और अधिकारों के बारे में जनप्रतिनिधियों को पूरी जानकारी दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति ऊना योजना क्षेत्र में भूमि खरीदकर निर्माण करना चाहता है, तो उसके लिए नगर एवं ग्राम योजना विभाग से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। विशेष रूप से धारा 16(सी) के अंतर्गत भूमि की बिक्री से पहले विभाग से प्लॉट स्वीकृत कराना और केवल विभाग द्वारा स्वीकृत उप-विभाजित प्लॉट ही खरीदना आवश्यक है। इससे निवासियों को सुव्यवस्थित, वर्गाकार या आयताकार प्लॉट के साथ उचित सड़कें और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

जागरूकता शिविर में भू-संपदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम (रेरा) के प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। निर्मल सिंह ने बताया कि अधिसूचित योजना क्षेत्र में यदि 500 वर्ग मीटर भूमि पर प्लॉट या 8 से अधिक अपार्टमेंट का निर्माण कर उन्हें विक्रय करना हो तो रेरा के अंतर्गत पंजीकरण अनिवार्य है। इसके अलावा जिला में कहीं भी 1000 वर्ग मीटर से अधिक भूमि पर प्लॉट या अपार्टमेंट का निर्माण एवं विक्रय होने पर उस क्षेत्र को डीम्ड योजना क्षेत्र माना जाएगा, जहां विभागीय स्वीकृति और रेरा पंजीकरण लेना अनिवार्य होगा।

निर्मल सिंह ने अवैध निर्माण से उत्पन्न होने वाली भविष्य की समस्याओं पर भी जोर दिया और उपस्थित जनप्रतिनिधियों से अपील की कि किसी भी प्रकार का निर्माण बिना विभागीय अनुमति न किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध निर्माण न केवल क्षेत्र के नियोजित विकास को बाधित करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों और पर्यावरण के लिए भी गंभीर समस्याएं पैदा करता है।

शिविर में योजना अधिकारी रमेश चन्द, वरिष्ठ प्रारूपकार रवि किशोर, कनिष्ठ अभियंता राधा देवी और कनिष्ठ प्रारूपकार रमेश चन्द सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने भी उपस्थित जनप्रतिनिधियों को नियमों और प्रावधानों की जानकारी दी और सवाल-जवाब के दौरान उनके सभी संदेहों का समाधान किया। इस जागरूकता शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा देना और अवैध निर्माण को रोकना था, ताकि क्षेत्र की जनता और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रह सकें।

इस प्रकार, नगर एवं ग्राम योजना विभाग द्वारा आयोजित यह शिविर न केवल जनप्रतिनिधियों के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि पूरे क्षेत्र में विकास और नियोजन के प्रति एक जागरूकता की भावना पैदा करने वाला कदम भी साबित हुआ।

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