Post by : Ram Chandar
ऊना: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में आयुर्वेदिक अस्पतालों और आयुष वेलनेस केंद्रों में दवाइयों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं। उपचार के लिए आने वाले मरीजों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध न होने से उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीजों को बिना दवा लिए ही वापस लौटना पड़ रहा है, जिससे उनमें असंतोष बढ़ता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, आयुष विभाग द्वारा भेजी गई दवाइयों का स्टॉक जिला स्तर पर पहुंच चुका है, लेकिन प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट लंबित होने के कारण इन दवाओं का वितरण अभी तक स्वास्थ्य संस्थानों तक नहीं किया जा सका है। गुणवत्ता जांच पूरी होने से पहले दवाओं को वितरित नहीं किया जा सकता, जिसके चलते वितरण प्रक्रिया रुकी हुई है।
जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों और आयुष वेलनेस केंद्रों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। मौसम में बदलाव के कारण सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार, त्वचा रोग, पाचन संबंधी समस्याएं और जोड़ों के दर्द से पीड़ित मरीजों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे समय में दवाइयों की कमी ने मरीजों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और अधिक गंभीर बनी हुई है, जहां लोग प्राथमिक उपचार के लिए आयुष केंद्रों पर निर्भर रहते हैं। दवाएं उपलब्ध न होने के कारण कई मरीजों को निजी दवा दुकानों से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों को केवल परामर्श देकर ही वापस भेजना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर इस कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है। नियमित रूप से उपचार लेने वाले पुराने मरीजों, विशेषकर गठिया, मधुमेह, रक्तचाप और अन्य दीर्घकालिक रोगों से पीड़ित लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है, क्योंकि उनकी दवाएं समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
इस संबंध में जिला आयुष अधिकारी डॉ. किरण शर्मा ने बताया कि दवाइयों का स्टॉक जिला मुख्यालय में उपलब्ध है, लेकिन विभाग की ओर से दवाओं की गुणवत्ता जांच से संबंधित लैब रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जैसे ही रिपोर्ट प्राप्त होगी, तुरंत सभी आयुर्वेदिक अस्पतालों और आयुष वेलनेस केंद्रों में दवाइयों का वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि विभाग स्थिति को गंभीरता से लेकर आवश्यक कदम उठा रहा है और जल्द ही दवाओं की आपूर्ति सामान्य कर दी जाएगी। विभाग का कहना है कि प्रक्रिया पूरी होते ही स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तरह सुचारु रूप से संचालित होने लगेंगी और मरीजों को राहत मिलेगी।
फिलहाल, मरीजों और उनके परिजनों को उम्मीद है कि लंबित रिपोर्ट जल्द जारी होगी और दवाइयों की आपूर्ति बहाल होने से आयुष संस्थानों में उपचार व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट आएगी।
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