Post by : Khushi Joshi
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से हवाई सेवा शुरू होने का इंतज़ार अब और लंबा होता नजर आ रहा है। जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट पिछले कई महीनों से खाली पड़ा हुआ है। बरसात शुरू होने से पहले दिल्ली और धर्मशाला के लिए उड़ानें बंद हो गई थीं और मानसून के बाद भी हालात नहीं बदले हैं। ऐसे में प्रदेश की राजधानी एक बार फिर हवाई संपर्क से कट चुकी है।
पहले केंद्र सरकार की उड़ान (UDAN) योजना के तहत दिल्ली से शिमला के बीच एलायंस एयर ने नियमित सेवा शुरू की थी। शिमला की छोटी एयर स्ट्रिप के कारण यहां केवल ATR विमान ही संचालित किए जाते थे। दिल्ली से शिमला के बाद वही विमान कुछ दिनों में धर्मशाला और कुल्लू के रूट पर भी उड़ान भरते थे। राज्य सरकार पर्यटन विभाग के माध्यम से इन रूटों पर हर वर्ष लगभग 11 करोड़ रुपये वायबिलिटी गैप फंडिंग के तौर पर देती रही है।
एलायंस एयर का कहना है कि दिल्ली–शिमला रूट घाटे का सौदा साबित हो रहा है। वायबिलिटी गैप फंडिंग बंद होने के बाद टिकट कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई, जिससे यात्रियों की संख्या लगातार घटती गई। एयरलाइन ने अब राज्य सरकार के सामने लगभग 20 करोड़ रुपये की नई गैप फंडिंग की मांग रखी है ताकि दिल्ली–शिमला उड़ानें दोबारा शुरू की जा सकें।
लेकिन हिमाचल सरकार इस लागत को बेहद अधिक मान रही है और इसी वजह से अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। नतीजा यह है कि शिमला की हवाई सेवा अनिश्चितता में फंसी हुई है। केंद्र सरकार ने संसद सत्र के दौरान भी हिमाचल के हवाई संपर्क को लेकर जानकारी दी है, जिसे देखकर साफ है कि इस मुद्दे का समाधान तुरंत होता दिखाई नहीं देता। हाई कोर्ट में भी इस विषय पर एक जनहित याचिका पर सुनवाई जारी है।
संसद में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि शिमला एयरपोर्ट पर अब तक 116 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन रनवे की सीमाएं, विमानों की पेलोड क्षमता में कमी और एयरलाइंस के हटने की वजह से सेवा को निलंबित रखना पड़ा है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि शिमला, कुल्लू-मनाली और धर्मशाला के हवाई अड्डे देश की 15 उड़ान-पुनर्जीवित एयर स्ट्रिप्स की सूची में शामिल हैं, लेकिन वर्तमान में किसी भी हवाई अड्डे से उड़ानें संचालित नहीं हो रही हैं।
पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग बताते हैं कि शिमला में उड़ानों के बंद होने से पर्यटन कारोबार को सीधा झटका लग रहा है। राजधानी से हवाई संपर्क टूटना न केवल पर्यटकों की संख्या को प्रभावित कर रहा है, बल्कि प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों पर भी असर डाल रहा है।
अब पूरी उम्मीद सरकार और एलायंस एयर के बीच होने वाले निर्णय पर टिकी है। यदि गैप फंडिंग पर सहमति बन जाए तो आने वाले महीनों में उड़ानें फिर से शुरू हो सकती हैं, लेकिन फिलहाल इसका कोई निश्चित संकेत नहीं है।
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