बुजुर्ग की हत्या के दोषी को उम्रकैद, मंडी अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला
बुजुर्ग की हत्या के दोषी को उम्रकैद, मंडी अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला

Post by : Himachal Bureau

June 23, 2026 11:19 a.m. 120

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में वर्ष 2022 में हुए चर्चित हत्याकांड मामले में स्थानीय अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी करन कुमार को हत्या का दोषी ठहराया है। इसके साथ ही आरोपी के पिता शिव दास को भी अपराध के सबूत मिटाने के मामले में दोषी करार दिया गया है। अदालत के इस फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में मामले की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।

2022 में हुई थी बुजुर्ग की हत्या

यह मामला मंडी जिले के सदर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पंडोह इलाके का है। पुलिस के अनुसार इस मामले की एफआईआर 1 जून 2022 को दर्ज की गई थी। घटना 31 मई 2022 की रात की बताई गई है। उस समय गांव सावरधार में एक निर्माणाधीन मकान के पास कुछ लोग लैंटर के काम के लिए बजरी इकट्ठी कर रहे थे।

मौके पर मौजूद लोगों में शिकायतकर्ता गोपाल, इलैक्ट्रीशियन विजय कुमार और ओम दत्त शामिल थे। इसी दौरान उन्होंने गांव के 65 वर्षीय बुजुर्ग गुरसाईं को आरोपी करन कुमार के साथ रास्ते से गुजरते हुए देखा था। उस समय किसी को भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों बाद एक बड़ी वारदात सामने आने वाली है।

चीख सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामीण

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ देर बाद अचानक गुरसाईं की जोरदार चीख सुनाई दी। आवाज सुनते ही आसपास मौजूद लोग तुरंत मौके की ओर दौड़े। जब वे वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि गुरसाईं जमीन पर गिरे हुए थे और उनकी गर्दन से तेजी से खून बह रहा था।

ग्रामीणों ने घायल बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाने की तैयारी शुरू की, लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और पुलिस को इसकी सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और मामले को गंभीरता से लिया।

पुलिस जांच में सामने आए अहम तथ्य

घटना के बाद पुलिस ने विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच शुरू की। जांच के दौरान घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए और कई लोगों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने पेश किया।

जांच एजेंसियों ने यह भी पता लगाया कि घटना के बाद कुछ ऐसे प्रयास किए गए थे जिनसे अपराध से जुड़े सबूतों को प्रभावित किया जा सकता था। इसी आधार पर आरोपी के पिता शिव दास की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। बाद में पुलिस ने उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की।

अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों को माना महत्वपूर्ण

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों का विस्तार से अध्ययन किया। अदालत ने पाया कि उपलब्ध प्रमाण मुख्य आरोपी करन कुमार के खिलाफ पर्याप्त हैं।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि अपराध के बाद सबूतों को मिटाने या छिपाने का प्रयास किया गया था। अदालत ने इस संबंध में आरोपी के पिता शिव दास की भूमिका को भी गंभीर माना। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।

करन कुमार को मिली उम्रकैद

अदालत ने मुख्य आरोपी करन कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी पाया। अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

अदालत के आदेश के अनुसार यदि आरोपी जुर्माना जमा नहीं करता है तो उसे दो वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भी भुगतना होगा। अदालत ने अपने फैसले में हत्या जैसे गंभीर अपराध को समाज के लिए चिंताजनक बताते हुए सख्त सजा सुनाई।

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पिता को भी हुई जेल की सजा

मामले में आरोपी के पिता शिव दास को भी राहत नहीं मिली। अदालत ने उन्हें अपराध के साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोषी करार दिया है। अदालत ने शिव दास को एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत का मानना था कि अपराध से जुड़े सबूतों को मिटाने का प्रयास न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करता है और ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जरूरी है।

फैसले से मिला न्याय का संदेश

मंडी की अदालत का यह फैसला यह संदेश देता है कि गंभीर अपराधों में दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलती है और न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने वालों को भी बख्शा नहीं जाता। इस मामले में हत्या के आरोपी के साथ-साथ सबूत मिटाने के आरोप में उसके पिता को भी दोषी ठहराया गया है।

करीब चार वर्ष पुराने इस मामले में आए फैसले ने पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद को मजबूत किया है। वहीं यह निर्णय समाज में कानून के प्रति विश्वास बढ़ाने वाला भी माना जा रहा है। अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है और लोग इसे न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उदाहरण मान रहे हैं।

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