बीपीईओ आनी को 12 फरवरी की हड़ताल का नोटिस, मिड डे मील वर्करों ने उठाई स्थायी नौकरी की मांग
बीपीईओ आनी को 12 फरवरी की हड़ताल का नोटिस, मिड डे मील वर्करों ने उठाई स्थायी नौकरी की मांग

Author : Beli Ram Ani, District Kullu

Feb. 3, 2026 10:25 a.m. 2611

आनी क्षेत्र में मिड डे मील वर्कर्ज यूनियन के बैनर तले कार्यरत मिड डे मील वर्करों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाने का ऐलान कर दिया है। इसी क्रम में मिड डे मील वर्कर्ज यूनियन आनी के पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें 12 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रीय हड़ताल को सफल बनाने को लेकर विस्तृत रणनीति बनाई गई। बैठक के उपरांत यूनियन की ओर से खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (बीपीईओ) आनी को विधिवत नोटिस सौंपा गया।

यूनियन पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मिड डे मील वर्करों की समस्याएं लंबे समय से अनसुनी की जा रही हैं, जिसके चलते अब संघर्ष के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। 12 फरवरी को होने वाली राष्ट्रीय हड़ताल में आनी क्षेत्र के सभी मिड डे मील वर्कर भाग लेंगे और स्कूलों में भोजन नहीं बनाया जाएगा। सभी वर्करों को आनी में आयोजित रैली में शामिल होने का आह्वान किया गया है।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि हड़ताल के दिन आनी के सभी सरकारी विद्यालयों में मिड डे मील का कार्य पूरी तरह ठप रहेगा। यूनियन नेताओं ने कहा कि यह कदम सरकार और शिक्षा विभाग का ध्यान मिड डे मील वर्करों की गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित करने के लिए उठाया जा रहा है।

मिड डे मील वर्करों की प्रमुख मांगों में सबसे अहम मांग नौकरी के स्थायी समाधान की है। वर्करों का कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें आज तक स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। इसके अलावा समय पर वेतन न मिलना, छुट्टियों की स्पष्ट व्यवस्था न होना और न्यूनतम वेतन से भी कम मानदेय दिया जाना उनकी प्रमुख समस्याओं में शामिल है।

यूनियन ने मांग की है कि मिड डे मील वर्करों को प्रतिमाह 30 हजार रुपये वेतन दिया जाए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें। साथ ही हाईकोर्ट के 12 महीने के बेमन (Back Wages/निर्णय) संबंधी फैसले को तुरंत लागू करने की मांग भी जोरशोर से उठाई गई। यूनियन का कहना है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद आज तक उसे धरातल पर लागू नहीं किया गया है, जो वर्करों के साथ अन्याय है।

एक अन्य महत्वपूर्ण मांग के रूप में यूनियन ने स्कूलों में 25 बच्चों की संख्या की शर्त को पूरी तरह हटाने की मांग की है। वर्करों का कहना है कि बच्चों की संख्या कम होने के आधार पर उनके कार्य और मानदेय को प्रभावित किया जाना गलत है, क्योंकि वे अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाते हैं।

मिड डे मील वर्करों ने आंगनबाड़ी कर्मियों की तर्ज पर छुट्टियां देने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि जब आंगनबाड़ी वर्करों को निर्धारित छुट्टियां मिल सकती हैं, तो मिड डे मील वर्करों को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है। इसके साथ ही अतिरिक्त कार्य के बदले अतिरिक्त वेतन देने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।

बैठक में यह भी मांग की गई कि जिन स्कूलों को बंद या मर्ज किया गया है, वहां कार्यरत मिड डे मील वर्करों को अन्य स्टाफ की तरह दूसरे स्कूलों में मर्ज करने की प्रक्रिया को लगातार जारी रखा जाए। वर्करों का कहना है कि स्कूल बंद होने की स्थिति में उन्हें बेरोजगार करना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है।

यूनियन नेताओं ने साफ कहा कि 12 फरवरी को सभी मिड डे मील वर्कर स्कूलों में खाना नहीं बनाएंगे और आनी में आयोजित रैली में अनिवार्य रूप से शामिल होंगे। यह रैली शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित की जाएगी, लेकिन इसमें वर्करों की एकजुटता और ताकत स्पष्ट रूप से दिखाई देगी।

इसके साथ ही बैठक में यह भी ऐलान किया गया कि यदि सरकार और शिक्षा विभाग ने मिड डे मील वर्करों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो जुलाई 2026 में मिड डे मील वर्कर शिमला कूच करेंगे। यह आंदोलन प्रदेश स्तर पर किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में मिड डे मील वर्कर भाग लेंगे।

यूनियन ने 21 अगस्त 2023 को प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, हिमाचल प्रदेश द्वारा जारी अधिसूचना को अक्षरशः लागू करने की मांग भी दोहराई। वर्करों का कहना है कि उक्त अधिसूचना में उनके हित में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए थे, लेकिन आज तक उन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।

मिड डे मील वर्करों ने स्पष्ट किया कि उनका यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने हक और सम्मान के लिए है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और जल्द से जल्द ठोस निर्णय ले, ताकि उन्हें बार-बार आंदोलन का सहारा न लेना पड़े।

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