Post by : Khushi Joshi
हिमाचल प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है और अब शातिर ठगों ने शिमला के एक बागबान को अपना निशाना बनाते हुए ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करीब 36 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। इस मामले में पीड़ित बागबान ने शिमला स्थित साइबर पुलिस थाना में शिकायत दर्ज करवाई है, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित बागबान ने अपनी शिकायत में बताया कि उसे एक अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन कॉल प्राप्त हुई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को एक निजी कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए बड़े मुनाफे का लालच दिया। ठग ने भरोसा दिलाया कि उसकी कंपनी सुरक्षित और भरोसेमंद है तथा कम समय में निवेश की गई राशि कई गुना बढ़ाई जा सकती है। शुरुआत में ठग की बातों पर संदेह होने के बावजूद लगातार संपर्क और मीठी बातों के चलते बागबान उनके झांसे में आ गया।
फोन पर दिए गए निर्देशों के अनुसार बागबान से एक मोबाइल एप डाउनलोड करवाई गई और ट्रेडिंग शुरू करने के नाम पर पहले 15 हजार रुपये जमा करवाए गए। इसके बाद ठगों ने उसे एक कथित आईपीओ में निवेश करने का प्रस्ताव दिया और धीरे-धीरे अलग-अलग किस्तों में उससे लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लिए। शिकायतकर्ता के अनुसार कुछ ही दिनों में उससे लगभग 14 लाख रुपये निवेश के नाम पर जमा करवा लिए गए।
इतना ही नहीं, इसके बाद ठगों ने सर्विस चार्ज और प्रोसेसिंग फीस का बहाना बनाकर अतिरिक्त रकम की मांग शुरू कर दी। भरोसा जीत चुके ठगों के कहने पर बागबान ने करीब 10 लाख रुपये और भेज दिए। कुछ समय बाद ठगों ने यह कहकर नया बहाना बनाया कि तकनीकी या सर्वर समस्या के कारण राशि गलत खाते में चली गई है और उसे ठीक करने के लिए फिर से रकम ट्रांसफर करनी होगी। इस पर भी विश्वास करते हुए पीड़ित ने करीब 10 लाख रुपये और उनके बताए खाते में जमा करवा दिए।
जब इसके बाद भी रकम वापस नहीं मिली और ठगों ने 30 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोसेसिंग चार्ज की मांग शुरू कर दी, तब बागबान को अपने साथ ठगी होने का अहसास हुआ। इसके बाद उसने पूरे मामले की शिकायत साइबर पुलिस स्टेशन शिमला में दर्ज करवाई। शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने संबंधित बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच शुरू कर दी है।
साइबर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सुनियोजित साइबर फ्रॉड का प्रतीत होता है, जिसमें निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को फंसाया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी में शामिल आरोपी किस राज्य या नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। साथ ही पीड़ित की रकम को ट्रैक करने के लिए संबंधित बैंकों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
इस घटना के बाद साइबर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या सोशल मीडिया लिंक पर भरोसा न करें। ऑनलाइन ट्रेडिंग या निवेश से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करें और बिना सत्यापन के किसी भी एप या लिंक के माध्यम से पैसे ट्रांसफर न करें। पुलिस का कहना है कि जागरूकता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
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