Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में मानसून की पहली तेज बारिश ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। चोलिंग क्षेत्र में मीरू नाले में अचानक फ्लैश फ्लड आने से काजा-किन्नौर-शिमला को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे पूरी तरह बंद हो गया। तेज बहाव के साथ आए मलबे, बड़े पत्थरों और कीचड़ ने सड़क को ढक दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इस दौरान कई यात्री और ट्रक चालक घंटों तक रास्ता खुलने का इंतजार करते रहे। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना में किसी के घायल होने या जान जाने की सूचना नहीं मिली।
मलबे में दबी दो गाड़ियां, हाईवे पर फंसे कई वाहन
फ्लैश फ्लड के दौरान चोलिंग प्राइमरी स्कूल के पास नाले में इतना तेज बहाव आया कि एक स्कॉर्पियो और एक पिकअप वाहन मलबे में दब गए। इसके अलावा सड़क बंद होने से दोनों तरफ बड़ी संख्या में वाहन फंस गए। इनमें सबसे ज्यादा मटर से लदे ट्रक शामिल थे। अचानक हाईवे बंद होने से ट्रक चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और राहत कार्य शुरू कराया।
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6 घंटे बाद अस्थायी रूप से खुला नेशनल हाईवे
प्रशासन ने सड़क से मलबा हटाने के लिए तुरंत भारी मशीनें लगाईं। लगातार कई घंटे तक चले राहत कार्य के बाद करीब छह घंटे में नेशनल हाईवे को अस्थायी रूप से यातायात के लिए खोल दिया गया। इसके बाद धीरे-धीरे फंसे हुए वाहनों को निकाला गया और यातायात सामान्य करने का प्रयास किया गया। हालांकि प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और मौसम खराब होने पर यात्रा से बचने की सलाह दी है।
रिब्बा में भी सुबह तीन बजे आया फ्लैश फ्लड
चोलिंग के अलावा किन्नौर के रिब्बा क्षेत्र में भी तड़के करीब तीन बजे फ्लैश फ्लड आया। अचानक आई बाढ़ के कारण रिब्बा से कण्डे को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग बंद हो गया। स्थानीय लोगों ने रात में ही अपनी गाड़ियों को सुरक्षित स्थानों पर हटाना शुरू कर दिया। कुछ छोटे वाहनों को आंशिक नुकसान पहुंचा है, लेकिन किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। लोगों ने पूरी रात जागकर हालात पर नजर रखी।
मटर की फसल लेकर जा रहे किसानों की बढ़ी चिंता
इन दिनों किन्नौर और आसपास के इलाकों में मटर का सीजन चल रहा है। बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल मंडियों तक भेज रहे हैं। हाईवे बंद होने से मटर से लदे ट्रक रास्ते में फंस गए। इससे किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि समय पर फसल मंडियों तक नहीं पहुंचने से उन्हें आर्थिक नुकसान होने का डर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे हालात लंबे समय तक बने रहे तो इसका सीधा असर खेती और व्यापार पर पड़ सकता है।
प्रशासन ने राहत कार्य तेज किए
किन्नौर के उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा ने बताया कि चोलिंग के पास मार्ग को जल्द से जल्द साफ करने के लिए भारी मशीनरी तैनात की गई है। प्रशासन की टीम लगातार मौके पर मौजूद है और फंसे हुए वाहनों को सुरक्षित निकालने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के बाद ही यातायात सामान्य रूप से शुरू किया जाएगा। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे प्रशासन की सलाह का पालन करें और मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें।
लिप्पा, चोलिंग और रिस्पा में भी हुआ नुकसान
भारी बारिश का असर केवल चोलिंग और रिब्बा तक सीमित नहीं रहा। लिप्पा, चोलिंग और रिस्पा क्षेत्रों में भी कई संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं। कई जगहों पर भूस्खलन और मलबा आने से लोगों का आवागमन बाधित हो गया है। स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली और पेयजल सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
प्रभावित लोगों को राहत देने की उठी मांग
किन्नौर से भाजपा नेता सूरत सिंह नेगी ने कहा कि मानसून की पहली ही बारिश ने जिले के कई हिस्सों में भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से प्रभावित इलाकों का जल्द सर्वे कराने, नुकसान का सही आकलन करने और प्रभावित परिवारों, किसानों तथा बागवानों को उचित राहत और मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क, बिजली और पानी जैसी जरूरी सेवाओं को जल्द बहाल किया जाना चाहिए ताकि लोगों को राहत मिल सके।
प्रदेश में कई सड़कें और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित
भारी बारिश का असर पूरे हिमाचल प्रदेश में देखने को मिल रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में सड़कें बंद हुई हैं और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। लोक निर्माण विभाग और बिजली बोर्ड की टीमें लगातार बहाली के काम में जुटी हैं। मौसम विभाग ने कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर सहित कई जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। लोगों को नदी-नालों के पास जाने से बचने और मौसम खराब होने पर जरूरी होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है।
फिलहाल किन्नौर में नेशनल हाईवे को अस्थायी रूप से खोल दिया गया है और किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यदि बारिश का दौर जारी रहता है तो पहाड़ी क्षेत्रों में फिर से भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
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