Post by : Himachal Bureau
उत्तराखण्ड सरकार ने अपने सरकारी स्कूलों में शिक्षा के नए दृष्टिकोण को लागू करने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। राज्य के स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) ने उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के साथ साझेदारी कर 4000 से अधिक सरकारी स्कूलों में कौशल और उद्यमिता आधारित शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस पहल का लक्ष्य कक्षा 6 से 12 के छात्रों को प्रारंभिक स्तर से ही वास्तविक दुनिया के कौशल प्रदान करना और उनमें उद्यमिता की सोच विकसित करना है।
इस कार्यक्रम के तहत कक्षा 6 से 8 के छात्रों को (Skill-Based Learning) प्रदान किया जाएगा, जबकि कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए पहले से चल रहे उद्यमिता प्रोग्राम के माध्यम से उन्हें वास्तविक उद्यम बनाने, उसे संचालित करने और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करने के अवसर दिए जाएंगे। इस कार्यक्रम में छात्रों को आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता, टीम वर्क और ओनरशिप की भावना विकसित करने का अवसर मिलेगा, जो उनके जीवन और करियर में बेहद उपयोगी साबित होगा।
पाठ्यक्रम को National Curriculum Framework for School Education के सहयोग से विकसित किया गया है। कौशल बोध प्रोग्राम में कक्षा 6 से 8 के छात्रों के लिए नौ मॉड्यूल शामिल हैं, जिनमें लाइफ फॉर्म, मशीन और मटेरियल्स, और ह्युमन सर्विसेस जैसे विषय शामिल हैं। छात्रों को क्लासरूम में टीम में काम करते हुए छोटे उद्यम बनाने का अवसर मिलता है और यह समझने में मदद मिलती है कि उनके निर्णय का व्यावहारिक परिणाम क्या होता है। इस तरह छात्रों की शिक्षा पारंपरिक पढ़ाई के बजाय सक्रिय क्रिएशन और प्रैक्टिकल एप्लीकेशन की ओर बढ़ती है।
एससीईआरटी और उद्यम लर्निंग फाउंडेशन अध्यापकों को भी प्रशिक्षित करेंगे ताकि वे छात्रों के लिए व्यवहारिक और प्रयोगात्मक लर्निंग का माहौल तैयार कर सकें। अध्यापक इस प्रक्रिया में छात्रों को लगातार सीखने, प्रयोग करने और सुधार करने के अवसर प्रदान करेंगे।
पहले ही बड़ी कक्षाओं में इस प्रोग्राम के परिणाम दिखाई देने लगे हैं। उदाहरण के तौर पर कक्षा 11 के छात्रों ने 1500 से अधिक बिज़नेस आइडिया विकसित किए, जिनमें से 350 आइडिया जिला स्तरीय प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किए गए। 47 टॉप आइडिया राज्य स्तरीय प्रदर्शनियों में पेश किए गए, और 10 से अधिक छात्रों ने अपने उद्यमों को जारी रखते हुए लाभ अर्जित करना शुरू कर दिया। उदाहरण के लिए जीआईसी नथुवाला के ध्रुव ने फैबइंडिया के साथ साझेदारी कर अपने डिजाइन किए हुए परिधान सप्लाई किए, जबकि जीआईसी बादवाला के समीर ने डेयरी प्रोडक्ट्स तैयार कर उन्हें स्थानीय मार्केट में सप्लाई करना शुरू किया।
मेकिन माहेश्वरी, सीईओ और सह-संस्थापक, उद्यम लर्निंग फाउंडेशन ने बताया, “कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों को समस्याओं को समझने, आइडिया टेस्ट करने, निर्णय लेने और परिणामों पर विचार करने की आदत डालने से वे वास्तविक दुनिया के लिए तैयार होते हैं। यह छह साल की लर्निंग उन्हें आत्मविश्वासी बनाती है और वे नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित होते हैं।”
एससीईआरटी उत्तराखण्ड के प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर श्री सुनील भट्ट ने कहा कि यह प्रोग्राम NEP 2020 के अनुरूप मिडल स्कूल में व्यावसायिक शिक्षा को शामिल करता है। छात्रों को व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त होता है और वे प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग के माध्यम से वास्तविक समस्याओं का समाधान सीखते हैं।
बंदना गरब्याल, डायरेक्टर, एकेडमिक रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने कहा, “कौशल बोध प्रोग्राम सरकारी स्कूलों में शिक्षा को फ्यूचर-रैडी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रोग्राम क्लासरूम में वास्तविक दुनिया की एप्लीकेशन को शामिल करता है और अध्यापकों को ऐसे टूल्स उपलब्ध कराता है, जिससे वे छात्रों में समस्या समाधान और जिम्मेदारी की भावना विकसित कर सकते हैं। उत्तराखण्ड के लिए यह पहल शिक्षा को अधिक प्रासंगिक, व्यवहारिक और प्रभावशाली बनाती है।”
इस तरह उत्तराखण्ड के सरकारी स्कूलों में उद्यम और कौशल आधारित शिक्षा से छात्रों को केवल किताबों का ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन और करियर में सफलता पाने के लिए जरूरी व्यावहारिक क्षमता भी मिलेगी।
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