Author : Rajesh Vyas
राज्य के राजस्व विभाग की सबसे छोटी इकाई पटवार सर्कल, जो सरकार के लिए निरंतर राजस्व (Revenue) जुटाती है, की दुर्दशा को लेकर पूर्व विधायक प्रवीन कुमार ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पटवार कार्यालय, जिन्हें अक्सर “दूध देने वाली गाय” की तरह कहा जाता है क्योंकि ये लगातार राजस्व उत्पन्न करते हैं, उनकी स्थिति अत्यंत जर्जर और असुरक्षित है।
पूर्व विधायक प्रवीन कुमार ने बताया कि कई पटवार कार्यालयों में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति विशेष रूप से महिला पटवारों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और असहनीय है। उन्होंने कहा कि पटवार महोदय की दैनिक दिनचर्या में न केवल प्रमाण पत्रों की तसदीक और जमीन संबंधी मामलों का प्रबंधन शामिल है, बल्कि प्रत्यक्ष जनता की आवाजाही भी इन कार्यालयों में लगातार रहती है। इसके बावजूद, इन कार्यालयों के भवन जर्जर और सुविधाहीन हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कई कार्यालयों में चार लोगों को बैठाने के लिए पर्याप्त कुर्सियां भी उपलब्ध नहीं हैं। भवनों की दीवारें टूट चुकी हैं, खिड़कियों और दरवाजों की स्थिति खराब है, पलस्तर और शीशे टूटा हुआ है। प्रवीन कुमार ने सरकार की वर्तमान नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि जय राम सरकार की तुलना में सुक्खू सरकार ने राजस्व शुल्क और स्टाम्प ड्यूटी में अंधाधुंध वृद्धि की है, जिससे पटवार कार्यालयों पर कार्यभार और बढ़ गया है।
पूर्व विधायक ने कहा कि किसी भी घटना या प्राकृतिक आपदा के तुरंत बाद रिपोर्ट तैयार करना भी पटवार का ही काम है। यही रिपोर्ट प्रभावित पक्ष को आर्थिक राहत दिलाने में आधार बनती है। उन्होंने राजस्व मंत्री श्री जगत सिंह नेगी का ध्यान इन कार्यालयों की जर्जर स्थिति की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि इन भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि मंत्री महोदय को अपने व्यक्तिगत घर की दुर्दशा सुधारने के बजाय केवल मीडिया में सुर्खियां बनाने के लिए टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। पहले उन्हें राजस्व विभाग की इन आवश्यक इकाइयों की स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। प्रवीन कुमार ने जोर देकर कहा कि जब तक पटवार कार्यालयों की मूलभूत संरचना और सुविधाएं नहीं सुधारी जाएंगी, तब तक विभाग के कर्मचारियों और जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ता रहेगा।
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