Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में छोटे और सीमांत किसानों की भूमि से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मामलों के समाधान की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। इसी उद्देश्य से गठित कैबिनेट उपसमिति की बैठक राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी उपस्थित रहे। उपसमिति ने भूमि नियमितीकरण से संबंधित नीति के मसौदे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया और आगे की प्रक्रिया तय की।
बैठक में अधिकारियों ने उपसमिति को जानकारी दी कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप छोटे और सीमांत किसानों द्वारा लंबे समय से किए जा रहे भूमि कब्जे के नियमितीकरण के लिए एक नीति ढांचा तैयार किया गया है। सरकार का प्रयास है कि ऐसे मामलों का समाधान स्पष्ट नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाए ताकि पात्र किसानों को राहत मिल सके और भविष्य में विवादों की संभावना कम हो।
विस्तृत चर्चा के बाद उपसमिति ने निर्णय लिया कि तैयार की गई प्रस्तावित नीति को अब राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष विचार और अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। यदि मंत्रिमंडल इसे मंजूरी देता है, तो नीति को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए भारत सरकार को भेजा जाएगा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकार इस विषय को चरणबद्ध और विधिसम्मत तरीके से आगे बढ़ाना चाहती है।
जगत सिंह नेगी ने बैठक के बाद कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को राहत प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि भूमि कब्जे से जुड़े मामलों को बिना किसी कानूनी जटिलता के समाधान करना संभव नहीं है, इसलिए सरकार ने ऐसा ढांचा तैयार करने पर जोर दिया है जो न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप हो और किसानों के हितों की रक्षा भी करे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नीति लागू होने के बाद पात्र किसानों को स्पष्ट प्रक्रिया के माध्यम से लाभ मिल सकेगा।
बैठक में विधि विभाग और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। प्रधान सचिव (विधि) राजीव बाली, अतिरिक्त सचिव (राजस्व) अनिल चौहान तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने उपसमिति को कानूनी प्रावधानों, संभावित प्रशासनिक प्रक्रियाओं और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से संबंधित बिंदुओं पर जानकारी दी।
राज्य सरकार का मानना है कि छोटे और सीमांत किसान ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और भूमि से जुड़ी अनिश्चितता उनके आर्थिक और सामाजिक जीवन को प्रभावित करती है। इसलिए सरकार एक ऐसी नीति लागू करना चाहती है जो न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए वास्तविक पात्र किसानों को राहत प्रदान करे और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करे। अब अगला महत्वपूर्ण कदम राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी होगा, जिसके बाद नीति को केंद्र सरकार के पास भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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