स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने ब्राह्मी खेती से आर्थिक मजबूती हासिल की
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने ब्राह्मी खेती से आर्थिक मजबूती हासिल की

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

June 3, 2026 3:40 p.m. 121

हिमाचल प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य में कई योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाना, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना और कृषि के साथ-साथ औषधीय फसलों की खेती को प्रोत्साहित करना है। सरकार का यह प्रयास ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है और महिलाओं के जीवन स्तर को ऊपर उठा रहा है।

कांगड़ा जिले के बैजनाथ उपमंडल के धानग गांव की महिलाओं ने सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। यहां स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने मिशन ध्न्वंतरी के तहत ब्राह्मी की खेती शुरू की और धीरे-धीरे इसे एक सफल आजीविका का साधन बना लिया। शुरुआत में इन महिलाओं को ब्राह्मी की खेती की बहुत कम जानकारी थी और इसके लिए बाजार भी सीमित था, लेकिन उन्होंने छोटे स्तर से शुरुआत कर अपने प्रयास जारी रखे।

पहले वर्ष लगभग 1300 पौधे लगाए गए, लेकिन उत्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इसके बावजूद महिलाओं ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं। धीरे-धीरे उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन मिला और सामूहिक प्रयासों से खेती का स्वरूप बदलने लगा। आज यह खेती पूरे गांव की पहचान बन चुकी है और कई अन्य किसान भी इससे जुड़ रहे हैं।

धानग गांव में दुर्गा शक्ति, जागृति, लक्ष्मी और प्रेरणा जैसे स्वयं सहायता समूह इस खेती से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। महिलाएं केवल कच्ची ब्राह्मी बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे कैंडी, शरबत, स्वास्थ्यवर्धक पेय और औषधीय उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है।

स्थानीय किसानों और समूहों के अनुसार शुरुआत में सबसे बड़ी समस्या बाजार की थी, लेकिन धीरे-धीरे कंपनियों ने स्वयं संपर्क करना शुरू कर दिया। अब कई कंपनियां पूरे उत्पादन को खरीदने में रुचि दिखा रही हैं। इससे महिलाओं का उत्साह बढ़ा और उन्होंने बड़े स्तर पर खेती शुरू कर दी।

उत्पादन में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। पहले वर्ष जहां केवल 12 किलोग्राम उत्पादन हुआ था, वहीं बाद में यह बढ़कर 70 किलोग्राम और फिर 122 किलोग्राम तक पहुंच गया। वर्तमान में वर्ष में तीन बार कटाई की जा रही है, जिससे नियमित आय प्राप्त हो रही है। ताजा ब्राह्मी की बिक्री हरियाणा सहित अन्य राज्यों में हो रही है और सूखी ब्राह्मी की कीमत भी बहुत अधिक मिल रही है। यह खेती कम भूमि में अधिक लाभ देने वाली साबित हो रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है।

उपायुक्त कांगड़ा ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह समूह सरकार की योजनाओं का सफल उपयोग कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे ताकि महिलाओं को और बेहतर लाभ मिल सके। धानग गांव की यह पहल पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जहां महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और मेहनत से अपनी जिंदगी बदल दी है।

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