हाईकोर्ट से राहत: बागी पूर्व विधायकों को मिलेगी पेंशन, सरकार को आदेश
हाईकोर्ट से राहत: बागी पूर्व विधायकों को मिलेगी पेंशन, सरकार को आदेश

Post by : Himachal Bureau

April 10, 2026 3:39 p.m. 269

हिमाचल प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है, जहाँ सुक्खू सरकार को कानूनी मोर्चे पर एक बड़ा झटका लगा है। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कांग्रेस से बागी होकर भाजपा में शामिल हुए 6 पूर्व विधायकों को एक बहुत बड़ी राहत प्रदान की है। कोर्ट ने इन पूर्व विधायकों की पेंशन रोकने के फैसले को गलत ठहराते हुए विधानसभा सचिवालय और प्रदेश सरकार को आदेश दिए हैं कि इन सभी की पेंशन तत्काल प्रभाव से बहाल की जाए।

उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करने के बाद इन विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद सरकार ने इनकी पेंशन और अन्य सुविधाओं पर रोक लगा दी थी। इस कार्रवाई के खिलाफ इन पूर्व विधायकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ से अब उनके हक में फैसला आया है।विस्तृत विवरण के अनुसार, हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार और विधानसभा सचिवालय को सभी पात्र याचिकाकर्ताओं की बकाया पेंशन और नियमित मासिक पेंशन को एक महीने के भीतर जारी करना होगा।

कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि पेंशन इन पूर्व विधायकों का अधिकार है और इसे इस तरह से नहीं रोका जा सकता। हाई कोर्ट की इस खंडपीठ ने सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित एक माह की अवधि के भीतर इन आदेशों का पालन नहीं किया जाता है, तो सरकार को पेंशन की राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह आदेश उन 6 पूर्व विधायकों के लिए बड़ी संजीवनी माना जा रहा है जिन्होंने बगावत के बाद विधानसभा की सदस्यता खो दी थी और बाद में भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ा था।

इस फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है क्योंकि इसे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की रणनीति के खिलाफ एक नैतिक और कानूनी हार के रूप में देखा जा रहा है। बागी विधायकों का तर्क था कि सदस्यता रद्द होने का उनकी पिछली सेवाओं की पेंशन से कोई कानूनी संबंध नहीं है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। अब राज्य सरकार को न केवल इन पूर्व विधायकों को उनकी पिछली सेवाओं का बकाया भुगतान करना होगा, बल्कि भविष्य के लिए भी उनकी पेंशन सुनिश्चित करनी होगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब सरकार के पास इन आदेशों को मानने के अलावा बहुत सीमित विकल्प बचे हैं, जिससे पूर्व विधायकों के खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई है।

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