Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्र में पहली बार राष्ट्रीय पक्षी मोर (Peacock) का दर्शन हुआ है। यह दुर्लभ नजारा मनाली के पास स्थित बर्फ से ढके जंगलों में जगतसुख में देखा गया। हिमाचल वन विभाग के पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव वार्डन के लिए यह एक बेहद रोमांचक और आश्चर्यजनक घटना है।
मोर का असामान्य आवास
विशेषज्ञों के अनुसार मोर आमतौर पर मैदानी क्षेत्रों में पाया जाता है, और इसकी सामान्य ऊंचाई लगभग 1,600 फीट मानी जाती है। लेकिन इस बार यह पक्षी लगभग 6,500 फीट की ऊंचाई पर दिखाई दिया, जो कि हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहली बार होने वाली घटना है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण और पारिस्थितिकी में बदलाव, वायुमंडलीय तापमान में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के संकेत हैं।
जगतसुख के ग्रामीण सुमित, भूमिदेव, राजेश और नितिन ने बताया कि इस जंगल में पहले भी बर्फ से ढके इलाके में मोर के जोड़े देखे गए हैं। उनका मानना है कि यह मोर इस विशेष वातावरण के अनुकूल हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह दृश्य दुर्लभ है और इसे देखना सौभाग्य की बात है।
डीएफओ वन्य प्राणी कुल्लू, राजेश शर्मा ने कहा कि मोर सामान्य पक्षियों में आता है और अपने आवास के प्रति अत्यधिक चयनात्मक नहीं होता। हालांकि पारंपरिक रूप से यह पक्षी मैदानी क्षेत्रों का निवासी माना जाता है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में इसे सामान्य से अधिक ऊंचाई पर देखा जाना इस बात का संकेत है कि मोर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी धीरे-धीरे अपनापन महसूस कर रहे हैं।
पर्यावरणीय बदलाव और ऊंचाई वाले क्षेत्र
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में तापमान में वृद्धि और पारिस्थितिकी परिवर्तन के कारण हो सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में खेती और मानव बस्तियों के विस्तार से ऊंचाई पर गर्मी बढ़ रही है, जिससे मोर जैसी मैदानी प्रजातियां भी उच्च क्षेत्रों की ओर माइग्रेट कर रही हैं।
सर्दियों में जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है, यह पक्षी निचले इलाकों में अपने मूल आवास की ओर लौट जाते हैं। लेकिन अब यह देखा गया है कि मोर पहले की तुलना में ज्यादा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रह रहे हैं।
वन्यजीव अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल एक बार मोर का ऊंचाई पर दिखना यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है कि मोरों में आवास परिवर्तन स्थायी रूप से हो रहा है। हालांकि यदि ऐसी घटनाएं लगातार होती हैं, तो यह मोरों के आवास में बदलाव और पर्यावरणीय अनुकूलन की प्रवृत्ति को दर्शाएगा।
वन्यजीव विभाग इस घटना को रिकॉर्ड कर रहा है और भविष्य में और शोध करेगा कि हिमालयी क्षेत्र में उच्च ऊंचाई पर मोर की उपस्थिति पर्यावरणीय बदलाव का संकेत है या अस्थायी घटना है। विभाग ने पक्षी प्रेमियों और स्थानीय लोगों से भी अनुरोध किया है कि इस प्रकार की घटनाओं की सूचना तुरंत वन विभाग को दें ताकि मोर और अन्य वन्यजीवों के व्यवहार और प्रवास पर अध्ययन किया जा सके।
यह घटना न केवल हिमाचल के पक्षी प्रेमियों के लिए रोमांचक है, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता के शोधकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है कि हिमालय में पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन तेजी से हो रहे हैं।
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