Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में नशे के बढ़ते मामलों को लेकर राज्य सरकार अब और अधिक सख्त रुख अपनाने जा रही है। खासतौर पर चिट्टा तस्करी में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ा संदेश देने के उद्देश्य से सरकार एक बड़ा कानूनी कदम उठाने की तैयारी में है। प्रदेश सरकार अब ऐसे लोगों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने के लिए कानून बनाने जा रही है, जिनके खिलाफ चिट्टे के मामले दर्ज हैं या जो तस्करी के आरोप में पकड़े जा चुके हैं।
इस संबंध में विधि विभाग के साथ विस्तृत चर्चा के बाद राज्य सरकार ने संशोधन विधेयक का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। यह विधेयक आगामी विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जाएगा। प्रस्तावित कानून के तहत, यदि कोई व्यक्ति चिट्टा तस्करी के मामले में पकड़ा गया है या उसके खिलाफ इस संबंध में एफआईआर दर्ज है, तो उसे पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि सरकार इसके लिए पंचायती राज अधिनियम (Panchayati Raj Act) में नया कानूनी प्रावधान जोड़ने जा रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अब तक सैकड़ों लोगों के खिलाफ चिट्टा तस्करी से जुड़े मामले दर्ज हो चुके हैं, जो समाज के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है।
उन्होंने यह भी बताया कि चिट्टे के मामलों में केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि पुलिस कर्मियों और अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारी भी पकड़े गए हैं। सरकार ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए दोषी पाए गए कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने जैसे कठोर कदम भी उठाए हैं। अब सरकार का मानना है कि यदि पंचायत प्रतिनिधियों से जुड़े चुनावी कानून को सख्त किया जाए, तो समाज में एक मजबूत और सकारात्मक संदेश जाएगा।
पंचायती राज मंत्री ने कहा कि विधि विभाग से विचार-विमर्श के बाद यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रस्तावित कानून संवैधानिक रूप से मजबूत हो। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल भी पहले यह स्पष्ट कर चुके हैं कि किसी व्यक्ति को चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित करना एक कानूनी विषय है और यदि इसमें स्पष्ट प्रावधान नहीं होंगे, तो यह मामला अदालत तक जा सकता है। इसी कारण सरकार इस संशोधन में सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट नियम जोड़ रही है।
इसी बीच, हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर भी हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को प्रदेश में मतदाता सूचियां जारी की जा सकती हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला उपायुक्तों को 30 जनवरी तक मतदाता सूचियों का प्रकाशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि 31 जनवरी को प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके बाद पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी की जा रही है। अभी तक राज्य के 47 नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त किए जा चुके हैं। सरकार ने इसके लिए राजस्थान और अन्य राज्यों के नियमों और ड्राफ्ट का भी अध्ययन किया है।
मतदाता सूचियों का प्रकाशन पंचायती राज चुनावों की अगली प्रक्रिया को तय करेगा। हालांकि, यह भी चर्चा है कि मतदाता सूचियों के प्रकाशन की तिथि को दो दिन आगे बढ़ाया जा सकता है। कुल मिलाकर, एक ओर जहां राज्य सरकार पंचायत चुनावों की तैयारियों में जुटी है, वहीं दूसरी ओर चिट्टा तस्करी के खिलाफ सख्त कानून लाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को नशामुक्त और स्वच्छ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है।
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