1 अप्रैल से लागू नए नियम, हिमाचल में बिजली की दरें कम और शराब की कीमतें बढ़ीं
1 अप्रैल से लागू नए नियम, हिमाचल में बिजली की दरें कम और शराब की कीमतें बढ़ीं

Post by : Himachal Bureau

April 1, 2026 4:16 p.m. 158

हिमाचल प्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से आम जनता और व्यापारियों के लिए दो बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। एक तरफ राज्य के उपभोक्ताओं को बिजली की दरों में मामूली कमी से राहत मिली है, वहीं शराब के शौकीनों की जेब पर नया बोझ पड़ने वाला है।

राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने नए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की नई दरों को मंजूरी दी है। इस फैसले से प्रदेश के लगभग 28 लाख बिजली उपभोक्ताओं को लाभ होगा। बिजली दरों में कटौती का सबसे बड़ा फायदा औद्योगिक क्षेत्र (Industries) को होगा, जहां भारी मात्रा में बिजली की खपत होती है। बोर्ड की औसत आपूर्ति लागत पिछले साल $6.76$ रुपये प्रति यूनिट थी, जो अब घटकर $6.75$ रुपये प्रति यूनिट हो गई है। हालांकि यह केवल प्रतीकात्मक रूप से 1 पैसे प्रति यूनिट की कमी है, लेकिन औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए इसका मतलब कई लाख रुपये की बचत हो सकता है।

सरकार की 125 यूनिट मुफ्त बिजली की योजना पहले की तरह जारी रहेगी। इसका सीधा लाभ छोटे और मध्यम परिवारों को मिलेगा, जिनकी मासिक खपत 125 यूनिट तक होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से आम जनता के बिजली बिलों पर कुछ राहत पहुंचेगी, हालांकि औद्योगिक और बड़े उपभोक्ता इसका ज्यादा लाभ उठा पाएंगे।

वहीं, शराब के मामलों में इस साल उपभोक्ताओं के लिए राहत नहीं है। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही हिमाचल प्रदेश में शराब महंगी हो गई है। आबकारी विभाग ने नई नीति के तहत ठेकों की नीलामी पिछले साल के मुकाबले 10% अधिक बेस प्राइज पर की है। इस कारण शराब की कीमतें अब 80 रुपये से लेकर 200 रुपये तक बढ़ सकती हैं।

कुल्लू और लाहौल-स्पीति के सभी ठेकों का जिम्मा तेलंगाना की एक कंपनी ने लिया है, जबकि अन्य जिलों में नीलामी प्रक्रिया अभी जारी है। प्रदेश में पहली बार शराब ठेकों के लिए e-auction शुरू की गई है। यदि कुछ क्षेत्रों में ठेके नीलाम नहीं हो पाते, तो पुराने मालिकों को अस्थायी रूप से इन्हें चलाने की अनुमति दी जाएगी।

इस बदलाव का असर आम जनता और व्यापारियों दोनों पर पड़ेगा। बिजली की मामूली कमी से घरों और उद्योगों को राहत मिलेगी, लेकिन शराब की बढ़ी कीमतों से उपभोक्ताओं को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का यह कदम राज्य के राजस्व और उद्योगों दोनों को संतुलित रखने का प्रयास है।

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