हिमाचल में 200 करोड़ निवेश घोटाला 5,000 एजेंटों पर कार्रवाई
हिमाचल में 200 करोड़ निवेश घोटाला 5,000 एजेंटों पर कार्रवाई

Post by : Ram Chandar

Feb. 24, 2026 4:18 p.m. 120

हिमाचल प्रदेश में 200 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश घोटाला, 5,000 एजेंटों पर मामला दर्ज हिमाचल प्रदेश में ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के खिलाफ 200 करोड़ रुपये के बड़े निवेश घोटाले का खुलासा हुआ है। प्राप्त शिकायतों के अनुसार, इस घोटाले में करीब 5,000 एजेंट शामिल थे, जिन्होंने आम लोगों को अधिक लाभ का लालच देकर निवेश के लिए पैसे जमा करवाए।

एजेंटों ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में सक्रिय रहते हुए घर-घर जाकर, स्थानीय कार्यालयों और बैठकों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए जोड़ा। उन्होंने निवेशकों को यह भरोसा दिलाया कि उनका निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और उन्हें अन्य जगहों की तुलना में अधिक लाभ मिलेगा। इस प्रकार आम जनता को धोखे में रखकर उनसे बड़ी राशि जमा की गई।

घोटाले का दायरा बहुत व्यापक था। इस नेटवर्क के जरिए सोलन, शिमला, मंडी, सिरमौर और कांगड़ा सहित प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्या में लोगों से पैसे एकत्र किए गए। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि एजेंटों का नेटवर्क बेहद संगठित था और लोगों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रचार, मीटिंग्स, बैठकों और लालच भरे वादों का इस्तेमाल किया गया।

सोसायटी के चेयरमैन और निदेशकों के खिलाफ शिमला में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस और संबंधित विभाग इस घोटाले की गहन जांच कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि निवेशकों को किए गए वादों और दस्तावेजों में कई तरह के भ्रामक और धोखाधड़ी वाले विवरण शामिल थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के निवेश घोटालों में आम निवेशक बिना पूरी जानकारी और वैधता की जांच किए पैसे नहीं डालें। उन्होंने निवेशकों से सलाह दी है कि हमेशा सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थाओं और प्रमाणित निवेश विकल्पों का ही चयन करें। इसके अलावा निवेश से जुड़े सभी दस्तावेज़ सुरक्षित रखें और किसी भी संदेह या अज्ञात एजेंट द्वारा प्रस्तावित निवेश से पहले विशेषज्ञ की राय अवश्य लें।

इस मामले ने प्रदेश में निवेशकों में भय और असुरक्षा की स्थिति पैदा कर दी है। लोगों को चेतावनी दी गई है कि वे किसी भी प्रकार के लालच या अत्यधिक लाभ का वादा करने वाले निवेश स्कीम में शामिल न हों। पुलिस और वित्तीय संस्थाएं मिलकर निवेशकों की सुरक्षा और ऐसे घोटालों की रोकथाम के लिए अभियान चला रही हैं।

हालांकि मामले की जांच अभी जारी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के घोटाले भविष्य में भी हो सकते हैं। इसलिए निवेशक सावधानी बरतें और निवेश से पहले हमेशा पूरी जानकारी और वैधता की जांच करें।

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