Post by : Ram Chandar
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भटियात उपमंडल की ग्राम पंचायत ककरोटी में एक गंभीर और चिंता जनक घटना सामने आई। स्थानीय किसानों के अनुसार, एक तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया और 22 भेड़-बकरियों को मौत के घाट उतार दिया। इस हमले से प्रभावित किसान को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है, क्योंकि उनकी सारी भेड़-बकरियां गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।
जानकारी के अनुसार, गौरता गांव के उद्यम सिंह ने अपनी भेड़-बकरियों को घर के समीप जंगल में चरने के लिए छोड़ रखा था। देर शाम तक भेड़-बकरियां वापस नहीं लौटने पर जब उद्यम सिंह मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने अपनी भेड़-बकरियों को मृत अवस्था में पाया। यह दृश्य देखकर ग्रामीणों में भारी चिंता और आक्रोश व्याप्त हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों की बड़ी संख्या घटनास्थल पर पहुंची। ग्रामीणों ने घटना की जानकारी अधिकारियों तक तुरंत पहुंचाई। मंगलवार को वेटनरी विभाग के डॉक्टर कुलदीप सिंह ने मौके का दौरा किया और मृत भेड़-बकरियों का पोस्टमार्टम किया। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम से स्पष्ट हो गया है कि भेड़-बकरियों की मौत तेंदुए के हमले के कारण हुई है और पशुओं में कोई बीमारी का संकेत नहीं मिला।
वन विभाग के वनरक्षक लेखराज ने बताया कि तेंदुए का यह हमला एक प्राकृतिक व्यवहार के कारण हुआ है। उन्होंने कहा कि वन विभाग जल्द ही स्थिति का जायजा लेकर प्रभावित परिवार को सरकारी मैनुअल के अनुसार फौरी राहत उपलब्ध करवा देगा। साथ ही, इलाके में तेंदुओं और अन्य वन्य जीवों के व्यवहार पर नजर रखने के लिए विशेष टीम गठित की जाएगी।
नायब तहसीलदार सिंहुता ने हल्का पटवारी को घटना की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद प्रभावित परिवार को उचित मुआवजा और राहत प्रदान की जाएगी। वन विभाग और प्रशासन मिलकर क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए विभिन्न उपाय करेंगे।
स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन से अनुरोध किया है कि वह जंगल के निकट रहने वाले गांवों में सुरक्षा के उपाय तेज करें। उन्होंने यह सुझाव दिया कि भेड़-बकरियों के चरने के लिए विशेष सुरक्षित क्षेत्र निर्धारित किए जाएं और जंगल में तेंदुओं की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में तेंदुए और अन्य वन्य जीवों के हमले आम हैं, लेकिन उचित सावधानी और प्रशासनिक निगरानी के माध्यम से ऐसे नुकसान को कम किया जा सकता है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे भेड़-बकरियों को जंगल में अकेले चरने के लिए न छोड़ें और रात में किसी भी जानवर को जंगल के नजदीक न छोड़ा जाए।
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि वन्य जीवों और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। प्रशासन, वन विभाग और ग्रामीणों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि दोनों के बीच संघर्ष कम से कम हो और सुरक्षा उपायों के माध्यम से ऐसी घटनाओं से बचाव संभव हो।
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