Post by : Ram Chandar
शिमला: हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करने के क्रम में शिक्षकों की कमी को दूर करने और शिक्षण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आने देने के लिए सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। स्कूल शिक्षा निदेशालय को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी स्कूल में स्वीकृत पद रिक्त रह जाते हैं, तो उन्हें तुरंत सीधे भर्ती (Direct Recruitment) के माध्यम से भरा जाए। यह कदम विशेष रूप से छात्रों की पढ़ाई, शिक्षण की गुणवत्ता और शैक्षणिक गतिविधियों को नियमित बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
शिक्षा निदेशालय के अनुसार, सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होने से कई स्कूलों में स्टाफ की आवश्यकता बढ़ जाएगी। इसलिए यदि तबादलों, स्थानांतरण या किसी अन्य कारण से पद खाली रहते हैं, तो उन्हें चयन परीक्षा से पहले भी तुरंत भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से भरा जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी स्वीकृत पद को रिक्त नहीं रहने दिया जाएगा, ताकि शिक्षण कार्य प्रभावित न हो।
साथ ही, जिन राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को इस वर्ष बोर्ड परीक्षा केंद्र घोषित किया गया है और जिन्हें हाल ही में अन्य स्कूलों के साथ मर्ज किया गया है, वहाँ परीक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा। दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं पहले की तरह उन्हीं स्कूल परिसरों में आयोजित की जाएंगी, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा, भ्रम या अंतिम समय में बदलाव का सामना न करना पड़े।
सरकारी सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाने के लिए अब तक लगभग 6000 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से करीब 2000 आवेदकों ने अभी तक फीस जमा नहीं करवाई है। आवेदन करने की अंतिम तिथि अब 5 मार्च, 2026 तक बढ़ा दी गई है, ताकि अधिक योग्य और इच्छुक शिक्षक आवेदन कर सकें। इसके अतिरिक्त, पहले से जमा आवेदनों में सुधार करने के लिए करेक्शन विंडो 6 और 7 मार्च को खोली जाएगी। इस अवसर का उपयोग करके शिक्षक अपनी व्यक्तिगत जानकारी या अन्य विवरणों में सुधार कर सकते हैं।
प्रधानाचार्य पद के लिए न्यूनतम अवशिष्ट सेवा अवधि की शर्त को तीन साल से घटाकर दो साल कर दिया गया है। इस निर्णय से अधिक योग्य और अनुभवी शिक्षक इस पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह छूट केवल प्रधानाचार्य पद के लिए लागू होगी, जबकि अन्य सभी शर्तें पहले की तरह ही रहेंगी। चयन प्रक्रिया और अन्य नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि यह निर्णय विद्यार्थियों और प्रदेश की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने शिक्षकों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन से अपील की कि वे इन निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन में पूरी तरह सहयोग करें। उन्होंने कहा कि इस कदम से सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ेगी, विद्यार्थियों को नियमित शिक्षण मिलेगा और शिक्षा में व्यवधान की समस्या समाप्त होगी।
यह पहल हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक शिक्षा के विकास और विद्यार्थियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। सरकार की इस कार्रवाई से स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और प्रदेश के सभी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने की संभावना मजबूत होगी।
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