अब कफ सिरप लेने के लिए डॉक्टर की पर्ची जरूरी, सरकार ने जारी किए नए नियम
अब कफ सिरप लेने के लिए डॉक्टर की पर्ची जरूरी, सरकार ने जारी किए नए नियम

Post by : Himachal Bureau

July 11, 2026 1:55 p.m. 128

देश में दवाओं के गलत इस्तेमाल और नशे की बढ़ती समस्या को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने दवा बिक्री के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ऐसी कई पीने वाली दवाएं, जिनमें अल्कोहल की मात्रा अधिक होती है, बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं खरीदी या बेची जा सकेंगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से दवाओं का गलत उपयोग कम होगा और युवाओं में नशे की बढ़ती आदत पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

अब डॉक्टर की पर्ची होगी जरूरी

नए नियम के अनुसार जिन दवाओं में 12 प्रतिशत से अधिक एथिल अल्कोहल होता है और जो 30 मिलीलीटर से बड़ी बोतल में उपलब्ध हैं, उन्हें अब बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं बेचा जाएगा। इसमें कई तरह की कफ सिरप और अन्य पीने वाली दवाएं शामिल हैं। अब मरीज को ऐसी दवा खरीदने के लिए पंजीकृत डॉक्टर द्वारा जारी प्रिस्क्रिप्शन दिखाना होगा। इसके बिना मेडिकल स्टोर इन दवाओं की बिक्री नहीं कर सकेंगे।

सरकार ने इस बदलाव को लागू करने के लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन किया है। संशोधित नियमों के तहत इन दवाओं को अब 'शेड्यूल H1' श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी की दवाओं की बिक्री पहले से अधिक सख्त निगरानी में होगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी दवाएं केवल वास्तविक जरूरत वाले मरीजों तक ही पहुंचें और उनका दुरुपयोग न हो।

मेडिकल स्टोर को रखना होगा पूरा रिकॉर्ड

नए नियमों के तहत मेडिकल स्टोर संचालकों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। अब उन्हें इन दवाओं की हर बिक्री का पूरा रिकॉर्ड अलग रजिस्टर में दर्ज करना होगा। इसमें मरीज का नाम, डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन, दवा का नाम, मात्रा और बिक्री की तारीख जैसी जानकारी सुरक्षित रखनी होगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित विभाग इस रिकॉर्ड की जांच भी कर सकेगा। यदि कोई मेडिकल स्टोर नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

नशे के लिए हो रहा था दवाओं का गलत इस्तेमाल

पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों से ऐसी शिकायतें सामने आई थीं कि कुछ लोग कफ सिरप और अन्य अल्कोहल युक्त दवाओं का इस्तेमाल इलाज के बजाय नशे के लिए कर रहे थे। खासकर युवाओं में इन दवाओं का गलत उपयोग चिंता का विषय बनता जा रहा था। बिना डॉक्टर की सलाह के आसानी से मिलने वाली इन दवाओं का दुरुपयोग रोकने के लिए लंबे समय से सख्त नियमों की मांग की जा रही थी। सरकार का यह फैसला उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जिन मरीजों को वास्तव में डॉक्टर की सलाह पर ऐसी दवाओं की जरूरत होती है, उन्हें इलाज में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। उन्हें केवल डॉक्टर की पर्ची के आधार पर दवा आसानी से मिल सकेगी। हालांकि जो लोग बिना सलाह के ऐसी दवाएं खरीदते थे, उन्हें अब ऐसा करना संभव नहीं होगा। इससे दवाओं के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

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सरकार का उद्देश्य क्या है?

सरकार का कहना है कि इस नियम का मुख्य उद्देश्य लोगों को दवाओं के दुरुपयोग से बचाना और नशे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण करना है। साथ ही दवा वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना भी इस फैसले का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन नियमों का सही तरीके से पालन किया गया तो दवाओं के गलत इस्तेमाल में कमी आएगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

नए नियम लागू होने के बाद अब 12 प्रतिशत से अधिक एथिल अल्कोहल वाली और 30 मिलीलीटर से बड़ी बोतलों में मिलने वाली कई कफ सिरप तथा अन्य पीने वाली दवाएं बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी। मेडिकल स्टोर को हर बिक्री का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा और संबंधित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से दवाओं का दुरुपयोग रुकेगा, नशे की समस्या कम होगी और दवा बिक्री व्यवस्था अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी।

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